भरगामा प्रखंड मुख्यालय के शौचालय में वर्षों से ताला बंद, लोगों को होती है परेशानी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर। <&sol;strong> जिले के भरगामा प्रखंड मुख्यालय कार्यालय परिसर में आमलोगों के लिए बने शौचालय व यूरिनल में वर्षों से ताले लटके होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। फिलहाल विभिन्न कार्यों को लेकर प्रखंड मुख्यालय आने वाले लोगों को शौच आदि के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। बताया जाता है कि इस वक्त यहां के लोग शौच आदि के लिए किसी गली या खेतों का सहारा लेते हैं और यत्र-तत्र गंदगी फैलाते हैं। विशेषकर विभिन्न कार्यों को लेकर प्रखंड मुख्यालय कार्यालय में आयी महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है। इस समस्या को लेकर महिला कर्मी और दर्जनों महिलाएं ने अपना नाम नहीं छापने की स्थिति में कहती हैं कि प्रखंड सह अंचल कार्यालय आयी महिलाओं को कई बार शौचालय जाने की आवश्यकता पड़ती है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>लेकिन यहां शौचालय में ताला लटका रहने के कारण और शौचालय की व्यवस्था दुरुस्त नहीं रहने के कारण महिलाएं को काफी परेशान होती है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से शौचालय बनाए जाने के लिए काफी धन खर्च किया गया है। लेकिन यहां महिलाओं के लिए शौचालय बनाए जाने और पहले से बने शौचालय को दुरुस्त करवाने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं किया गया है। नतीजतन सबसे ज्यादा परेशानी यहां की महिला अधिकारी एवं महिला कर्मियों के साथ-साथ अन्य महिलाओं को हो रही है&comma;जिनकी हमेशा हीं इज्जत पर बन आती है। इसके अलावा यहां सेविका-सहायिका सहित आम महिला जो भी यहां अपना कार्य कराने आती हैं&comma;उनकी दुर्दशा देखने लायक होती है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कईबार लोगों ने शिकायत की&comma;परंतु आजतक किसी ने भी इन समस्याओं को सुनने को राजी नहीं हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि यहां विकास के नाम पर बस ठीकेदारी एवं कमीसन का खेल है&comma;किसी को आमआदमी की समस्या से कोई मतलब नहीं रह गया है। सरकार महिलाओं को आधी हिस्सेदारी तो जरूर दे दी&comma;परंतु उनके सम्मान के लिए कुछ भी नहीं कर पाई है। अब देखना बड़ा हीं दिलचस्प होगा कि प्रशासन इसओर ध्यान देता भी है या फिर इसी तरह दशकों से आ रही पीडा को यहां की महिलाएं झेलती रहती हैं। वहीं इस संबंध में डीडीसी रोजी कुमारी बताती हैं की वे इस समस्याओं का समाधान को लेकर बीडीओ को निर्देशित की हैं।<&sol;p>&NewLine;

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