वर्ल्ड हियरिंग डे पर पारस एचएमआरआई में जागरूकता कार्यक्रम, विशेषज्ञों ने सुनने की समस्या पर दी अहम सलाह

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित। <&sol;strong>वर्ल्ड हियरिंग डे के अवसर पर पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल&comma; पटना में ईएनटी विशेषज्ञों द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया&period; कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे मरीज पहुंचे&comma; जिन्हें आधुनिक इलाज के जरिए सुनने की क्षमता वापस मिली है&period; इस मौके पर उन्हें सम्मानित भी किया गया&period; विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर जांच और सही उपचार से सुनने की क्षमता को बचाया जा सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ईएनटी विशेषज्ञ डॉ&period; रश्मि प्रसाद ने बताया कि तेज आवाज&comma; संक्रमण या अन्य कारणों से एक या दोनों कानों से सुनने की क्षमता खो चुके मरीजों के लिए बोन एंकर हियरिंग एड की सुविधा पारस एचएमआरआई अस्पताल में उपलब्ध है&period; माइक्रोसिया यानी जन्म से बाहरी कान नहीं होने की स्थिति में पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों में भी बाहा इम्प्लांट लगाया जा सकता है&period; इससे ऐसे बच्चे भी सामान्य रूप से सुन सकेंगे&period; उन्होंने कहा कि मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में लोग इस तकनीक का लाभ लेकर अपनी सुनने की क्षमता वापस पा रहे हैं&comma; लेकिन बिहार में जागरूकता की कमी के कारण कई लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते और इलाज के लिए बाहर जाते हैं<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p> जबकि पारस एचएमआरआई में ही इसकी पूरी सुविधा मौजूद है। डायरेक्टर जनरल सर्जरी डॉ&period; ए&period; ए&period; हई ने बताया कि सुनने की समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है&comma; बल्कि छोटे बच्चों में भी देखने को मिलती है&period; उन्होंने सलाह दी कि अधिक शोरगुल से बचें&comma; हेडफोन का उपयोग सीमित रखें और कान बहने जैसी समस्या को नजरअंदाज नहीं करें तथा तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ&period; अमितेश मिश्रा ने कहा कि कान में बार-बार संक्रमण या जन्मजात बहरापन होने की स्थिति में तुरंत जांच करानी चाहिए&period; कई मामलों में कॉक्लियर इम्प्लांट के जरिए मरीजों की सुनने की क्षमता बहाल की जा सकती है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पारस हेल्थ के जोनल डायरेक्टर अनिल कुमार ने कहा कि अस्पताल की कोशिश है कि अधिक से अधिक लोगों तक बेहतर इलाज की सुविधा पहुंचे&period; उन्होंने बताया कि अब तक अस्पताल में 100 से अधिक कॉक्लियर और बाहा इम्प्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं&period; मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से भी कई मरीजों का इम्प्लांट कराया जा रहा है। कार्यक्रम में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ&period; मनीष कुमार&comma; एचआर हेड कंचन कुमार और फाइनेंस कंट्रोलर नीरज कुमार ने भी अपने विचार रखे और लोगों को जागरूक रहने की अपील की।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

पटना साहिब विधानसभा के सभी मंडलों में होगा दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर

जयपुर की तर्ज पर गणगौर महोत्सव 2026 का आयोजन 21 मार्च को

एमडीएम में अनियमितता की शिकायत पर जांच करने आए बीआरपी