लोगों में जागरूकता की मिसाल बनी आशा भावना रानी घोष

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon; <&sol;strong>समाज में अगर एक व्यक्ति भी बदलाव की ठान ले और उसके लिए जी तोड़ मेहनत करे तो उसे सफलता मिलने से कोई रोक नहीं सकता। ऐसी ही सामाजिक बदलाव का उदाहरण बनी हैं आशा भावना रानी घोष। पूर्णिया पूर्व प्रखंड के नीलगंज कोठी&comma; वार्ड नं 45 में कार्यरत आशा भावना ने अपने प्रयासों से न सिर्फ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया है बल्कि सरकार द्वारा चलाई गयी विभिन्न योजनाओं का लाभ भी दिलवा रही हैं। इसका फायदा यह हुआ है कि अब उस क्षेत्र के सभी लोग न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं बल्कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए बिना हिचके आशा से सहायता लेते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>टीकाकरण व परिवार नियोजन के लिए लोगों की बदली मानसिकता &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आशा भावना रानी घोष ने कहा कि आशा के रूप में काम शुरू करने पर क्षेत्र में बहुत समस्या होती थी। क्षेत्र में न तो ज्यादा गर्भवती महिलाएं टीका लगाती थी और न ही नवजात शिशुओं को ज्यादा टीका लगाया जाता था। इस क्षेत्र में जनसंख्या भी तेजी से वृद्धि हो रही थी क्योंकि ज्यादातर लोग परिवार नियोजन की सुविधाओं का लाभ नहीं लेना चाहते थे। मेरे द्वारा जब भी उन्हें जागरूक करने के लिए उसके घर जाया जाता था तो वे लोग या तो घर से बाहर नहीं निकलते थे या फिर सुविधा लेने से मना कर देते थे। उन्हें स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा जागरूक करने के लिए मैंने सबसे पहले तो उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ देना शुरू किया। क्षेत्र में जब भी किसी की तबियत खराब होने की सूचना मिलती थी तो मैं तुरंत पहुँच जाती थी और उन्हें दवाई उपलब्ध कराने&comma; अस्पताल पहुँचाने आदि में मदद करने लगी। नवजात शिशुओं की तबियत खराब होने की स्थिति में उन्हें समय पर टीका लगाने की सलाह देने लगी। कुछ लोगों को इसका लाभ होने पर अन्य लोगों द्वारा भी इसके लिए आगे आया गया और अब सभी लोग सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>परिवार नियोजन की सभी सुविधाओं का लेते हैं लाभ &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आशा भावना ने बताया कि पहले इस क्षेत्र में बहुत से ऐसे परिवार थे जहां एक घर में ही सात-आठ बच्चे होते थे। उन्हें परिवार नियोजन कराने के लिए कहने पर मना कर देते थे&comma; लेकिन अब उसी परिवार की नयी पीढी के बेटे&comma; बहु&comma; बेटियों द्वारा परिवार नियोजन की विभिन्न सुविधाओं का लाभ लिया जा रहा है। आशा भावना ने बताया कि उसके क्षेत्र के लोग परिवार नियोजन के स्थायी व अस्थायी सुविधाओं का पूरा लाभ उठा रहे हैं। अस्थायी साधनों में महिलाएं अन्तरा&comma; छाया&comma; माला-एन&comma; कॉपर-टी जैसी सुविधाओं का लाभ उठाती है तो पुरुषों द्वारा भी कंडोम का उपयोग किया जाता है। स्थायी साधन के रूप में महिला बंध्याकरण का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के पुरुषों को भी मेरे द्वारा पुरूष नसबंदी के लिए जागरूक किया जा रहा है। क्षेत्र के कुछ लोगों द्वारा इसका लाभ भी उठाया गया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>संस्थागत प्रसव में लाया बड़ा बदलाव &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आशा भावना ने लोगों को घर पर प्रसव कराने की मनोस्थिति को तोड़ते हुए संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई है। आशा भावना ने बताया कि पहले लोग अस्पताल में प्रसव कराना जरूरी नहीं समझते थे। गांव के लोग स्थानीय दाई से घर में ही प्रसव कराते थे। मेरे द्वारा लोगों को संस्थागत प्रसव से माँ और बच्चे को होने वाले फायदों की जानकारी दी गई जिससे कुछ लोगों द्वारा इसकी शुरुआत हुई। संस्थागत प्रसव कराने से महिला और उसके बच्चे के स्वास्थ्य में मिल रहे फायदों को देखते हुए अन्य लोग भी इसके लिए आगे आए। उन्होंने बताया कि पहले गांव में एक दाई द्वारा सभी प्रसव करायी जाती थी। लेकिन अब उस क्षेत्र के सभी लोगों द्वारा संस्थागत प्रसव हीं कराया जाता है। आशा ने बताया कि पहले घर में ही प्रसव कराने वाली दाई ने मां और बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपनी बेटी और बहू का भी संस्थागत प्रसव ही कराया। आशा ने बताया कि संस्थागत प्रसव के लिए उन्होंने क्षेत्र के लोगों को पूर्व से ही तैयारी कर लेने की जानकारी दी है। इसमें सबसे आवश्यक एम्बुलेंस की जानकारी या स्थानीय गाड़ी चालक का संपर्क नम्बर&comma; एएनएम से प्रसव पीड़ा के लक्षण की जानकारी लेने आदि मुख्य हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>कोरोना काल में भी निभाई सामाजिक जिम्मेदारी &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आशा भावना रानी घोष द्वारा कोरोना काल में भी बेहतर कार्य किया गया है। पूर्णिया पूर्व प्रखंड के बीएचएम विभव कुमार ने कहा कि कोरोना के शुरुआती दौर में जब कोई बाहर से उस क्षेत्र में आता था तो उनसभी लोगों की जानकारी आशा द्वारा समय पर दी जाती थी जिसके परिणामस्वरूप उस क्षेत्र में कोई व्यक्ति कोरोना ग्रसित नहीं हुआ। आशा द्वारा कोविड-19 टीकाकरण के लिए भी लोगों को जागरूक किया गया है जिससे कि उस क्षेत्र के ज्यादातर लोगों द्वारा टीका का लाभ उठाया गया है।<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

विश्व श्रवण दिवस पर एम्स पटना ने दिया जागरूकता का संदेश

बजट बैठक में टैक्स वसूली पर जोर, बकाया खत्म करने का लक्ष्य

इस्लामिया टीचर्स ट्रेनिंग बी.एड. कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्साह के साथ मनाया गया