तेज आवाज में बजने वाले भोंपू डीजे और वाहनों के हॉर्न के शोर से हो रही परेशानी को कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए किया प्रदर्शित

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">फुलवारी शरीफ&comma; अजीत।<&sol;mark><&sol;strong> सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच के साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक की श्रृंखला में महेश चौधरी के द्वारा लिखित एवं मिथिलेश कुमार पांडे निर्देशित नाटक- &&num;8220&semi;शोरगुल का प्रभाव&&num;8221&semi; की प्रस्तुति फुलवारीशरीफ वाल्मी में की गई&period; कलाकारों ने दिखाया कि बेवजह के भोंपु डीजे आदि के शोर से लोगों को बहुत परेशानियां होती हैं और ऐसे लोगों को जागरूक करने के लिए अपील की गई ताकि लोग सचेत हों &period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नाटक की शुरुआत सौरभ राज के स्वरबध्द गीत- रात के गहरी नींद में सोए थे शोर मचा कर तुम चले गए&comma; तनिक भी तू ना सोच सका मेरी हरकत से किसी को क्या होगा…&period; से की गई&period; इस नाटक में यह दिखाया गया की एक किसान दिन-भर अपने खेत में काम करके रात में जब वह घर में सोता है तो हाईवे स्थित उसके आवासीय स्थानों के सड़क से गुजरने वाले यातायात वाहनों द्वारा खासकर ट्रक&comma; ट्रैक्टर और पिकअप आदि में रात भर तेज ध्वनि में गाना बजाते हुए शोरगुल मचाते हैं और तेज आवाज में भोंपू &lpar;हॉर्न&rpar; का भी इस्तेमाल करते हैं जिसके कारण उस किसान को अनिद्रा की बीमारी हो जाती है&period; <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उसके परिवार में जो विद्यार्थी है उसको रात्रि में पढ़ने के समय एकाग्रता भंग होने से गहरा असर पड़ता है&comma; गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है&period; जो बुजुर्ग लोग हैं उनको नींद में भी खलन पहुंचती है इसलिए वह किसान अपनी पीड़ा को ब्यां करते हुए कहता है की आवासीय क्षेत्रो से गुजरने वाले हाईवे सड़क के यातायात स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण नहीं किया जाना चाहिए&comma; क्योंकि ध्वनि प्रदूषण &lpar;विनियमन और नियंत्रण&rpar; अधिनियम के मुताबिक रात 10&colon;00 बजे से सुबह 6&colon;00 बजे तक लाउडस्पीकर या लोक संबोधन प्रणाली&comma; ध्वनि उत्पन्न करने वाले यंत्र एवं भोंपू &lpar;हॉर्न&rpar; बजाने की इजाजत नहीं है&period; हालांकि इसके विपरीत इस्तेमाल करने के कारण आम लोगों को स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है इसलिए ध्वनि प्रदूषण पर रोकथाम के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है&period;<br>नाटक के कलाकार मिथिलेश कुमार पांडे&comma; सौरभ राज&comma; अमन&comma; करण&comma; नमन&comma; शशांक&comma; रंजन थे&period;<&sol;p>&NewLine;

Advertisements

Related posts

1 अणे मार्ग में दावत-ए-इफ्तार का आयोजन, बड़ी संख्या में रोजेदारों ने की शिरकत

समृद्धि यात्रा पर लछुआड़ पहुंचे सीएम, 914 करोड़ की योजनाओं का किया उद्घाटन और शिलान्यास

रामनवमी व ईद को लेकर शेखपुरा प्रशासन सतर्क, शांति समिति की बैठक आयोजित