मासूम रोजेदारों की मिसाल : तलहा मसूद और अनाया फातिमा ने रखा पहला रोजा

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> रमजान की रहमत और बरकत का खूबसूरत नजारा फुलवारी शरीफ में देखने को मिला&comma; जहां दो नन्हे रोजेदारों ने अपनी मासूम उम्र में पहला रोजा रखकर परिवार और समाज को भावुक कर दिया&period; एक ओर तलहा मसूद ने अपने जीवन का पहला रोजा मुकम्मल किया&comma; वहीं ग्राम नोहसा की छह वर्षीय अनाया फातिमा ने भी रोजा और नमाज अदा कर मिसाल पेश की&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>तलहा मसूद का पहला रोजा&comma; परिवार भावुक। अल्लाह की कृपा से तलहा मसूद ने अपने जीवन का पहला रोजा रखा&period; सेहरी करने की उत्सुकता में वह सुबह जल्दी उठ गया और हाथ-मुंह धोकर पूरे जोश के साथ तैयार हो गया&period; उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि पूरे दिन बिना खाए-पिए रहना कितना कठिन होगा। सुबह से ही भूख और प्यास का एहसास शुरू हो गया&comma; जो दोपहर और शाम तक बढ़ता गया&period; इसके बावजूद तलहा ने नमाज&comma; तिलावत और हल्के खेल-कूद के जरिए अपना समय गुजारा&period; परिवार वाले उसके हौसले और मुस्कुराते चेहरे को देखकर हैरान और खुश थे&period; अल्लाह के करम से तलहा ने अपना पहला रोजा पूरा किया&period; परिजनों ने उसके उज्ज्वल भविष्य और लंबी उम्र की दुआ की। अनाया फातिमा ने भी कायम की मिसाल।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ग्राम नोहसा&comma; फुलवारी शरीफ की रहने वाली छह वर्षीय अनाया फातिमा ने भी रमजान में रोजा रखकर सबका दिल जीत लिया&period; वह मोहम्मद खैरउद्दीन अरमान की बेटी और मोहम्मद अलाउद्दीन साहब की पोती हैं&period; परिवार में धार्मिक परंपराओं का माहौल रहा है&comma; जिसका असर अनाया पर साफ दिखता है। कम उम्र में रोजा रखना और नमाज अदा करना उसकी धार्मिक जागरूकता और परिवार की दीनी तालीम का प्रमाण है&period; दादा और पिता ने हमेशा इस्लामी मूल्यों को घर में स्थापित किया&comma; जिससे अनाया को प्रेरणा मिली&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दोनों मासूम रोजेदारों की इस पहल से परिवारों में खुशी का माहौल है&period; लोगों का कहना है कि सही मार्गदर्शन और हौसला मिले तो बच्चे भी छोटी उम्र में बड़े काम कर सकते हैं&period; रमजान के इस पाक महीने में तलहा और अनाया की कहानी समाज को सब्र&comma; अनुशासन और आस्था का संदेश दे रही है।<&sol;p>&NewLine;

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