सदर अस्पताल से रेफर के तीन घंटे बाद मिली एम्बुलेंस, महिला की हुई मौत!

&NewLine;<p><strong>जमुई&lpar;मो० अंजुम आलम&rpar;&colon;<&sol;strong> वैसे तो सदर अस्पताल अपने कारनामों से हमेशा सुर्खियों में बना रहा है&comma; लेकिन इस बार बुधवार की रात सदर अस्पताल में मौजूद एम्बुलेंस कर्मियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां सदर अस्पताल से डाक्टर द्वारा रेफर करने के बाद भी 3 घंटे तक एम्बुलेंस नहीं मिली। जिससे बीमार महिला की मौत हो गई।मृतका की पहचान खैरा थाना क्षेत्र के लालपुर गांव निवासी पवन तांती की 35 वर्षीय पत्नी रिंकू देवी के रूप में हुई है। महिला की मौत के बाद स्वजन आक्रोशित हो गए और सदर अस्पताल में शव के साथ जमकर हंगामा करने लगे। स्वजन द्वारा समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने का आरोप लागते हुए स्वास्थ्य कर्मियों व एम्बुलेंस कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। स्वजन ने बताया कि महिला कुछ दिनों से बुखार से पीड़ित थी। बुधवार की दोपहर बाद अचानक महिला की तबीयत बिगड़ गई जिसे एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया लेकिन फिर देर शाम 8 बजे महिला को गंभीर अवस्था में सदर अस्पताल लाया गया था&comma; जहां से डॉक्टर द्वारा प्राथमिक उपचार के बाद पटना रेफर किया गया था&comma; लेकिन एम्बुलेंस 3 घंटे बाद 11 बजे पहुंची थी।महिला को लेकर जैसे ही एम्बुलेंस सदर अस्पताल से निकली की पंचमंदिर रोड में ही महिला की मौत हो गई। स्वजन ने बताया कि अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्वजन ने बताया कि डाक्टर द्वारा रेफर करने के बाद एम्बुलेंस के लिए मौजूद कर्मी से बात किया गया तो चालक के खाना खाने की बात कहते हुए 10 मिनट में एम्बुलेंस आने की बात कही गई थी। लेकिन एम्बुलेंस तीन घंटे के बाद पहुंची तो चालक द्वारा तेल का खर्चा मांगा गया था। बोला गया था कि बिना पैसा दिए एम्बुलेंस नहीं जाएगी&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मरीजों को परेशानी न हो इसके लिए विभाग द्वारा सदर अस्पताल में 7 एम्बुलेंस की सुविधा दी गई है लेकिन 2 एम्बुलेंस खराब रहने की वजह से 5 एम्बुलेंस के सहारे ही रेफर मरीजों का भार उठाया जा रहा है। जिसमें तीन एम्बुलेंस पटना के लिए तो दो गर्भवती और एक्सीडेंटियल को लाने-ले जाने के लिए रखा जाता है। एम्बुलेंस की काफी कमी है जिस वजह से अमूमन रेफर मरीजों को निजी एम्बुलेंस का सहारा लेना पड़ता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कोट<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया था। रेफर मरीज को फौरन निःशुल्क एम्बुलेंस सुविधा देने की सख्त हिदायत दी गई है। तीन घंटे विलंब से एम्बुलेंस पहुंचने के कारणों का पता कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कोट<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मामले की जानकारी संबंधित कर्मियों से ली गई है। एम्बुलेंस नहीं रहने की वजह से थोड़ा विलंब हुई थी। पटना से एम्बुलेंस के आने के बाद बीमार महिला को भेजा गया था&comma;जिसकी रास्ते मे ही मौत हो गई थी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>रमेश कुमार&comma; अस्पताल प्रबंधक जमुई<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;

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