नई शिक्षा नीति 2020 को लेकर AISF का राज्यस्तरीय सेमिनार

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;strong> AISF ने माध्यमिक शिक्षक संघ भवन में राज्यस्तरीय सेमिनार का आयोजन किया। नई शिक्षा नीति देश के छात्र एवं शिक्षकों के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा। यह शिक्षा नीति वैसे समय में लागू हुआ जब देश के अंदर लॉक डाउन की स्थिति थी। तमाम संस्थान बंद थे। शिक्षा जैसे गंभीर मसलों पर संसद में बिना किसी चर्चा के केंद्र की मोदी सरकार ने इसे लागू कर दिया है। à¤¨à¤ˆ शिक्षा नीति 2020 के कारण गरीब व बंचित तबके के छात्र एवं छात्राएं शिक्षा से बंचित हो जाएंगे। मौजूदा शिक्षा नीति छात्र छात्राओं को अंधकार की ओर ले जाएगा। उक्त बातें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन&lpar;AISF&rpar; द्वारा बिहार अध्यमिक शिक्षक संघ भवन&comma; पटना में आयोजित नई शिक्षा नीति 2020 दाबे हकीकत और चुनौतियां विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद एवं बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के सचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा। उन्हौने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 से शिक्षा लगातर महंगी होगी। अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों को फंड नहीं मिलेगा&comma; बल्कि कर्ज दिया जाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने बताया कि शिक्षा का उद्देश्य होता है एक उन्नत चरित्र का निर्माण करना लेकिन नई शिक्षा नीति में इस उद्देश्य को बदलकर महज कुछ डिग्री और रोजगार से संबंधित डिप्लोमा हासिल करना बनाया जा रहा है। वही सेमिनार को संबोधित करते हुए विधानपार्षद एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पांडे ने कहा कि नई शिक्षा नीति के जरिए सरकार शिक्षा को व्यापार की वस्तु बनाना चाहती है। विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में संस्थान खोलने की खुली छूट देने की बात की गई। जिससे प्रतिस्पर्धा में भारत के विश्वविद्यालय पीछे छूट जाएंगे। इसका खामियाजा देश के गरीब छात्रों को भुगतना पड़ेगा। इस शिक्षा नीति में वैज्ञानिकता एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को समावेश के जगह धार्मिक आडंबर पर अधिक बल दिया है।&nbsp&semi; शिक्षकों के लिए भी यह शिक्षा नीति खतरनाक साबित होगी। क्योंकि उनके लिए भी कोई बेहतर सेवा शर्त की चर्चा नहीं की गई है। शिक्षकों को अब ठेके पर रखे जाएंगे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कुल मिलाकर पूरी शिक्षा नीति का अध्ययन करने पर पता चलता है कि सरकार अपनी जवाबदेही से शिक्षा को बाहर करना चाहते हैं। इतने बड़े फैसला बिना किसी सलाह मशविरा को शामिल किए एवं बिना किसी बहस के लाना सरकार के इस मानसिकता को दिखाता है। वही एआईएसएफ के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव बिजेंद्र केशरी ने कहा कि नई शिक्षा नीति का मकसद साफ साफ नहीं दिख रहा है। अब तक शिक्षा का जो पैटर्न था उसमें विज्ञान वाणिज्य और कला संकाय में पढ़ाई होती थी। लेकिन अब इसे खत्म करने की बात की गई। अब विज्ञान पढ़ने वाले छात्र भी अपने सिलेबस में बणिज्य या कला के विषय को शामिल कर सकते हैं। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कहीं सरकार छात्र नौजवानों को बेरोजगार रखने की मंशा से तो यह शिक्षा नीति नहीं ला रही है। क्योंकि इस शिक्षा नीति का मकसद कहीं से भी शिक्षा देना नहीं दिख रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस बात का भी डर है क्या छात्र विभिन्न विषयों को लेकर अपनी पढ़ाई पूरी करें और सरकार कह दे कि किसी खास विषय में अपकी दक्षता नहीं है इसलिए रोजगार नहीं मिलेगी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को बेहद ख़तरनाक बताया। सेमिनार की अध्यक्षता एआईएसएफ के राज्य अध्यक्ष अमीन हमजा ने किया। राज्य भर के विभिन्न जिले के सेमिनार में आए छात्रों का अभिनंदन संगठन के राज्य उपाध्यक्ष रजनीकांत कुमार ने किया। सेमिनार को बिहार महिला समाज की राज अध्यक्ष निवेदिता झा&comma; पुष्पेंद्र शुक्ला&comma; पटना जिला सचिव मीर सैफ अली&comma; तौशिक&comma; अमन&comma; पंकज&comma; सफदर&comma; कंचन&comma; राकेश&comma; प्रकाश&comma; मोहित&comma; राहुल यादव&comma; शमा परवीन सहित सैकड़ों छात्र उपस्थित रहें।<&sol;p>&NewLine;

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