SIR के खिलाफ और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कल राजभवन मार्च करेगा आइसा बिहार

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन &lpar;आइसा&rpar; बिहार की ओर से आज पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को आइसा बिहार के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड धनंजय&comma; राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड सबा आफ़रीन&comma; पालीगंज विधायक संदीप सौरभ और RYA के राज्य सचिव कॉमरेड शिवप्रकाश रंजन ने संबोधित किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे&comma; SIR के जरिए मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने&comma; चुनाव आयोग की भूमिका और देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते हमलों के खिलाफ कल&comma; 13 अक्टूबर को पटना में राजभवन मार्च निकालने की घोषणा की गई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आइसा बिहार के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड धनंजय ने घोषणा की कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे&comma; उनपर कानूनी कार्यवाही&comma; SIR को रद्द करने&comma; बिहार-बंगाल में फ़र्ज़ी चुनावों को रद्द करने और युवाओं के साथ बर्बरता के मुद्दे लेकर 13 अक्टूबर को 11 बजे पटना के गांधी मैदान गेट नं&period; 10 से राजभवन तक मार्च किया जाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आइसा बिहार की राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड सबा आफ़रीन ने कहा कि भाजपा सरकार की चुनावी धांधली उजागर होने के बाद देश में आपातकाल जैसी स्थिति पैदा की जा रही है। आज नागरिकों के मताधिकार पर हमला हो रहा है और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। बिहार में सबसे पहले SIR की प्रक्रिया लागू की गई। सवाल यह है कि जिस व्यवस्था के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया&comma; उसी व्यवस्था के बीच पेपर लीक की घटनाएं होती हैं और महिलाओं को सुरक्षा देने में सरकार नाकाम रहती है। आज बिहार में हजारों ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे जाने की शिकायतें सामने आई हैं&comma; जो जीवित हैं और अपने अधिकारों की मांग के साथ मौजूद हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पालीगंज विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि SIR के जरिए मतदाताओं के नाम काटे जाने का मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में हर आठवें मतदाता का वोट काटे जाने जैसी स्थिति सामने आई है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में निर्वाचन अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। फॉर्म-6 के जरिए नए मतदाताओं के नाम जोड़ने का प्रावधान संसद से पारित था लेकिन ज्ञानेश कुमार ने इसका इस्तेमाल वोट काटने के लिए किया। यूनहने कहा कि EROs को निहत्था कर ज्ञानेश कुमार ने पर्सनल टीम के द्वारा वोट काटे हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आइसा बिहार ने तमाम छात्र-नौजवानों&comma; लोकतंत्रपसंद नागरिकों&comma; वकीलों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे 13 अक्टूबर को पटना में आयोजित राजभवन मार्च में बड़ी संख्या में शामिल हों और SIR पर रोक लगाने&comma; चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को मजबूती से उठाएं।<&sol;p>&NewLine;

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