एम्स पटना ने ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के लिए बनाया देश का पहला क्रांतिकारी और बेहद हल्का उपकरण ‘सरज रिट्रैक्टर’

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>चिकित्सा विज्ञान और ब्रेन सर्जरी &lpar;न्यूरोसर्जरी&rpar; के क्षेत्र में एम्स पटना ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। यहाँ के डॉक्टरों ने पूरी तरह स्वदेशी और बेहद हल्का उपकरण &&num;8216&semi;सरज रिट्रैक्टर&&num;8217&semi; विकसित किया है। यह नया उपकरण जटिल से जटिल ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी को बहुत आसान&comma; सुरक्षित और सटीक बनाएगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अनोखे उपकरण को एम्स पटना के न्यूरोसर्जरी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ&period; सरज कुमार सिंह ने अपने विचारों और मेहनत से तैयार किया है। इस बड़ी खोज के लिए इसे भारत सरकार से आधिकारिक डिज़ाइन रजिस्ट्रेशन और &&num;8216&semi;सरज रिट्रैक्टर&&num;8217&semi; नाम का ट्रेडमार्क भी मिल चुका है जो एम्स पटना के नाम पर सुरक्षित है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>क्या होता है &&num;8216&semi;ब्रेन रिट्रैक्टर&&num;8217&semi; और अभी क्या समस्या थी&quest;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ब्रेन सर्जरी के दौरान &&num;8216&semi;रिट्रैक्टर&&num;8217&semi; डॉक्टरों का एक सबसे जरूरी औजार होता है। जब डॉक्टर दिमाग के अंदर गहरे बैठे ट्यूमर को निकालते हैं तो उन्हें दिमाग के बेहद नाजुक हिस्सों &lpar;टिश्यूज&rpar; को बहुत सावधानी से एक तरफ हटाकर रखना होता है ताकि अंदरूनी हिस्सों को साफ देखा जा सके। इसी काम के लिए रिट्रैक्टर का इस्तेमाल होता है। लेकिन अभी तक अस्पतालों में जो पारंपरिक रिट्रैक्टर इस्तेमाल होते हैं वे बहुत भारी और जटिल होते हैं&colon;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>• भारी वजन&colon; इनका वजन लगभग 3&period;5 किलोग्राम होता है।<br &sol;>• जटिल बनावट&colon; इनमें कई सारे जोड़ &lpar;जॉइंट्स&rpar; और अलग-अलग पुर्जे होते हैं।<br &sol;>• ज्यादा लोगों की जरूरत&colon; ऑपरेशन के दौरान इस भारी उपकरण को सेट करने और संभालने के लिए 2 से 3 डॉक्टरों या सहायकों की जरूरत पड़ती है।<br &sol;>• समय और खराबी का खतरा&colon; इसे लगाने में समय भी ज्यादा लगता है और कई पुर्जे होने के कारण सर्जरी के बीच में इसके खराब होने या ढीले होने का डर बना रहता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>क्यों खास और अलग है नया &&num;8216&semi;सरज रिट्रैक्टर&&num;8217&semi;&quest;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डॉ&period; सरज कुमार सिंह ने डॉक्टरों की इसी सालों पुरानी परेशानी को समझा और इसका हल निकाला। उन्होंने जो नया रिट्रैक्टर बनाया है उसकी खासियतें हैरान करने वाली हैं जैसे-<br &sol;>• 99&percnt; से भी कम वजन&colon; जहाँ पुराना उपकरण 3&period;5 किलो का था वहीं नया &&num;8216&semi;सरज रिट्रैक्टर&&num;8217&semi; मात्र 20 ग्राम का है। यानी यह पुराने उपकरण के वजन का एक प्रतिशत भी नहीं है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>• एक हाथ से संभालना आसान&colon; इसमें केवल एक जोड़ &lpar;सिंगल-जॉइंट&rpar; है। डॉक्टर इसे अकेले एक हाथ से आसानी से लगा सकते हैं&comma; एडजस्ट कर सकते हैं और हटा सकते हैं। इससे ऑपरेशन के दौरान दूसरे सहायकों पर निर्भरता खत्म हो जाती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>• साफ और खुली जगह&colon; आकार में बहुत छोटा और सुव्यवस्थित होने के कारण यह मरीज के सिर के पास ज्यादा जगह नहीं घेरता। इससे डॉक्टरों को हाथ हिलाने और सूक्ष्मदर्शी &lpar;माइक्रोस्कोप&rpar; से देखने में पूरी आजादी मिलती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>• टूट-फूट का कोई डर नहीं&colon; इसकी बनावट इतनी सरल है कि सर्जरी के दौरान इसके किसी पुर्जे के टूटने या ब्लॉक होने की कोई गुंजाइश नहीं रहती।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>&&num;8216&semi;मेक इन इंडिया&&num;8217&semi; और &&num;8216&semi;आत्मनिर्भर भारत&&num;8217&semi; को बड़ी मजबूती<br &sol;>भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस उपकरण को &&num;8220&semi;ब्रेन कॉर्टेक्स सेपरेटर इंस्ट्रूमेंट&&num;8221&semi; के रूप में रजिस्टर्ड किया है। यह खोज इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे हमारे देश के डॉक्टर अपनी सूझबूझ से ऐसी विश्व-स्तरीय तकनीकें बना सकते हैं जिन्हें आने वाले समय में व्यावसायिक तौर पर बाजारों और अस्पतालों में लॉन्च किया जा सके। यह पूरी तरह &&num;8216&semi;मेक इन इंडिया&&num;8217&semi; की सोच पर आधारित है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस शानदार कामयाबी पर डॉ&period; सरज कुमार सिंह और उनकी टीम को बधाई देते हुए एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने कहा कि-<br &sol;>&&num;8220&semi;सरज रिट्रैक्टर का बनना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जब हमारे डॉक्टर मरीजों की जमीनी दिक्कतों को समझते हैं तो वे कमाल के आविष्कार कर सकते हैं। एम्स पटना हमेशा से रिसर्च और नए विचारों को बढ़ावा देता रहा है। यह स्वदेशी तकनीक न केवल न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र को एक पायदान ऊपर ले जाएगी बल्कि चिकित्सा के क्षेत्र में हमारे देश को &&num;8216&semi;आत्मनिर्भर भारत&&num;8217&semi; बनाने के सपने को भी सच करेगी।&&num;8221&semi;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>आविष्कारक डॉ&period; सरज कुमार सिंह का क्या कहना है&quest;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अपने इस आविष्कार के बारे में बताते हुए डॉ&period; सरज कुमार सिंह ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ऑपरेशन थिएटर के माहौल को सरल बनाना था। वे डॉक्टरों के लिए एक ऐसा हल्का और मददगार औजार चाहते थे जिससे जटिल से जटिल सर्जरी भी कम से कम लोगों की मदद से और बिना किसी तनाव के पूरी की जा सके। मरीजों को मिलेगा सीधा फायदा&colon; एम्स पटना हमेशा से सस्ती&comma; सुलभ और स्वदेशी चिकित्सा तकनीकों को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। यह नया उपकरण देश भर के न्यूरोसर्जनों के लिए एक वरदान साबित होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे ब्रेन ट्यूमर और दिमाग की अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का ऑपरेशन पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित होगा और उनके ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।<br &sol;>इस बड़ी सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एम्स पटना बेहतरीन पढ़ाई&comma; आधुनिक रिसर्च और मरीजों की उच्च स्तरीय देखभाल के मामले में देश का एक अग्रणी संस्थान है।<&sol;p>&NewLine;

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