बिहार में बाल तस्करी पर एक्शन, एयरपोर्ट से लेकर जिलों तक 44 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट तैनात

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; à¤¸à¥à¤¨à¥€à¤² कुमार &colon;<&sol;strong> बिहार में बच्चों की चोरी और तस्करी की बढ़ती घटनाओं पर नकेल कसने के लिए पुलिस मुख्यालय ने अब तक का सबसे बड़ा &OpenCurlyQuote;ऑपरेशन कवच’ शुरू किया है&period; सीआईडी &lpar;कमजोर वर्ग&rpar; के एडीजी डॉ&period; अमित जैन ने राज्य में 44 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट &lpar;AHTU&rpar; के गठन का ऐलान किया है&period; अब मासूमों का सौदा करने वाले गिरोहों के लिए बिहार के रास्ते बंद होने वाले हैं&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>एयरपोर्ट से जिलों तक सुरक्षा का नया नेटवर्क<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बाल तस्करी पर लगाम कसने के लिए बिहार में सुरक्षा का दायरा अब एयरपोर्ट से जिलों तक बढ़ाया जा रहा है&period; एडीजी डॉ&period; अमित जैन ने बताया कि राज्य में 44 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का गठन किया गया है&period; इसके साथ ही पटना&comma; दरभंगा और गया एयरपोर्ट पर विशेष टीमें तैनात रहेंगी&period; इन यूनिटों का नेतृत्व इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी करेंगे&comma; जबकि जिला स्तर पर नोडल पदाधिकारी पुलिस उपाधीक्षक &lpar;मुख्यालय&rpar; होंगे&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एयरपोर्ट अक्सर तस्करी के संवेदनशील ट्रांजिट पॉइंट होते हैं&comma; इसलिए यहां चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित की गई है&period; अब किसी भी बच्चे को संदिग्ध परिस्थितियों में ले जाने वाले व्यक्ति की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई होगी&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>चार महीने में नहीं मिले बच्चे&comma; तो विशेष जांच<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में अब जांच को लंबित नहीं रहने दिया जाएगा&period; बिहार में लागू नई व्यवस्था के तहत यदि कोई बच्चा चार महीने तक बरामद नहीं होता है&comma; तो उसका केस स्वतः जिला स्तर की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सौंप दिया जाएगा&period; अधिकारियों का मानना है कि इससे न सिर्फ जांच तेज होगी&comma; बल्कि संगठित तस्करी गिरोहों तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अब तक कई मामलों में देखा जाता था कि स्थानीय थानों में दर्ज गुमशुदगी की फाइलें लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ पाती थीं&period; नई व्यवस्था इस स्थिति को बदलने की कोशिश है&period; जिला स्तर की विशेष यूनिट केवल गंभीर और लंबित मामलों पर फोकस करेगी&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राज्य के 1196 थानों को राष्ट्रीय स्तर के मिशन वात्सल्य पोर्टल से जोड़ दिया गया है&period; इस पोर्टल पर गुमशुदा और बरामद बच्चों का डाटा अपलोड किया जाता है&comma; जिससे जानकारी देशभर में साझा हो सके और खोज अभियान में तेजी आए&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>चौंकाने वाले आंकड़े&comma; तेज हुई कार्रवाई<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>साल 2025 के आंकड़े बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखते हैं&period; बिहार में बीते वर्ष कुल 14&comma;699 बच्चों की गुमशुदगी दर्ज की गई&comma; जिनमें से 7&comma;772 बच्चों को अब तक सुरक्षित बरामद किया जा चुका है&period; शेष 6&comma;927 बच्चों की तलाश जारी है और पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को पुराने मामलों की गहन समीक्षा करने का निर्देश दिया है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में बच्चे खुद घर लौट आते हैं&comma; लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने से वे कागजों में अब भी लापता दर्ज रहते हैं&period; इस समस्या को दूर करने के लिए अब घर-घर सत्यापन अभियान भी चलाया जा रहा है&comma; ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और खोज अभियान सही दिशा में आगे बढ़े&period;<&sol;p>&NewLine;

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