टीबी रोगियों की खोज के लिये चिह्नित पंचायतों में हो रहा है एसीएफ का संचालन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर<&sol;strong> जिले को टीबी मुक्त बनाने को लेकर विभागीय स्तर से जरूरी पहल की जा रही है। गौरतलब है की वर्ष 2025 तक देश को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति कई प्रयास किये जा रहे हैं। इसमें टीबी मुक्त पंचायत का निर्माण काफी महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि टीबी मुक्त पंचायत निर्माण को लेकर जिले के सभी प्रखंडों के दो पंचायत पूर्व से चिह्नित हैं। जहां संभावित मरीजों की खोज के लिये सक्रिय रोगी खोज अभियान संचालित किया जायेगा। इसके लिये प्रखंडवार कर्मियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया गया। ताकि सक्रिय रोगी खोज अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित कराया जा सके। टीबी मुक्त पंचायत निर्माण को लेकर निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले पंचायतों को क्षय रोग दिवस के मौके पर जिलाधिकारी के हाथों सम्मानित किया जायेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अभियान की सफलता के लिये कर्मियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला टीबी समन्वयक दामोदर शर्मा ने बताया कि जिले में सक्रिय रोगी खोज अभियान की सफलता को लेकर संबंधित कर्मियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कर्मियों के प्रशिक्षण के उपरांत कुछ एक प्रखंडों के चिह्नित पंचायतों में अभियान शुरू भी हो चुका है। टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत सभी प्रखंड के दो पंचायत चिन्हित किये गये हैं। अभियान नरपतगंज प्रखंड के अचरा&comma; पिठौरा&comma; रानीगंज के बोहरा रामपुर&comma; धामा जोकीहाट के काकन व गैरकी&comma; अररिया के बांसबाड़ी व संदलपुर गैडा&comma; फारबिसगंज के रामपुर दक्षिण व पोठिया&comma; सिकटी के बेंगा व ठेंगापुर पिपरा&comma; पलासी प्रखंड के कनखुदिया व पकड़ी&comma; कुर्साकांटा के कुआड़ी व कुर्साकांटा पंचायत चिह्नित किये जाने की जानकारी उन्होंने दी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>प्रति एक हजार आबादी पर होगी 50 लोगों की जांच<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला टीबी समन्वयक व निक्षय मित्र योजना के नोडल अधिकारी दामोदर शर्मा ने बताया कि चिह्नित पंचायतों में प्रति एक हजार आबादी 50 लोगों की टीबी जांच की जायेगी&period; इसमें दो या दो से कम मरीज मिलने सहित निर्धारित अन्य शर्तों को पूरा करने वाले पंचायत को टीबी मुक्त पंचायत घोषित करने की दिशा में जरूरी पहल की जायेगी। चिह्नित सभी पंचायतों में डोर-टू-डोर सक्रिय रोगी खोज अभियान संचालित किया जायेगा। इस क्रम में संभावित मरीजों को चिह्नित किया जायेगा। दूसरे दिन जांच के लिये सैंपल प्राप्त कर इसे नजदीकी डीएमसी में माइक्रोस्कोपिक जांच के लिये भेजा जायेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>आपसी समन्वय व सहयोग से होगा अभियान सफल<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला यक्ष्मा रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ वाईपी सिंह ने बताया कि चिह्नित पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने की विशेष पहल की जा रही है। अभियान की सफलता को लेकर संबंधित कर्मियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया गया है। प्रखंड स्तर पर विभिन्न विभागीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते अभियान की सफलता को लेकर अधिकारी व कर्मियों को निर्देशित किया गया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>टीबी पर प्रभावी नियंत्रण के प्रति विभाग सजग<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने कहा कि टीबी एक गंभीर रोग है। जो देश की प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं से एक है। इसे पूरी तरह समाप्त् करने के लिये सरकार&comma; स्वास्थ्य विभाग व स्थानीय प्रशासन के स्तर से विभिन्न स्तरों पर जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। जागरूकता की कमी व स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच की वजह से ग्रामीणों इलाकों में रोग का प्रसार तेजी से होता है। स्थानीय स्तर पर टीबी के प्रसार को रोकना व रोगियों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना टीबी मुक्त पंचायत का प्रमुख उद्देश्य है। इसकी सफलता को लेकर विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है।<&sol;p>&NewLine;

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