पहला रोज़ा रखकर अब्दुस समद हसनैन ने पाई सबकी दुआएं

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत। <&sol;strong>रमजान का आखिरी पड़ाव है उसके बावजूद नन्हे रोजदारों में भी रोजा रखने की होड़ लगी है&period;मात्र 6 वर्षीय अब्दुस समद हसनैन ने अपने जीवन का पहला रोज़ा रखकर परिवार और आसपास के लोगों के बीच खुशी का माहौल बना दिया&period; तबिश हसनैन के सुपुत्र अब्दुस समद के इस खास मौके पर घर में उत्साह और गर्व का माहौल देखा गया&period; छोटे से बच्चे की इस धार्मिक शुरुआत को लेकर परिजनों ने उसे खूब सराहा और दुआओं से नवाजा&period; नन्हे रोजेदार के पहला रोजा पूरा होते ही परिवार में दो दिन पहले ही ईद की खुशियां मनाई गई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अवसर पर उनके दादा स्वर्गीय मोहम्मद ज़फ़र हसनैन की यादें भी ताजा हो उठीं&period; परिवार के लोगों ने बताया कि उनके संस्कार और मार्गदर्शन की झलक अब्दुस समद के इस कदम में साफ दिखाई देती है&period; सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और बेहतर स्वास्थ्य के लिए दुआ की। रोज़ा खोलने के समय घर में खास इंतजाम किया गया&comma; जहां परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठे और इस खुशी को साझा किया&period; रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों ने भी फोन और सोशल मीडिया के जरिए अब्दुस समद को पहले रोज़े की मुबारकबाद दी&period; यह दिन उनके जीवन में एक नई और यादगार शुरुआत के रूप में दर्ज हो गया।<&sol;p>&NewLine;

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