हिंदुस्तानी पटरियों पर नहीं दौड़ेगी मेड इन चाईना ट्रेन, चीनी कंपनी को मिला ठेका होगा रद्द, चीन को अरबों रुपये का झटका!

नई दिल्ली(न्यूज़ क्राइम 24): गलवान में भारतीय सेना से पीएलए के सिपाहियों का भिड़ना शी जिनपिंग के लिए भारी पड़ गया है। विश्व पटल पर इज्जत गंवाने के बाद अब चीन को भारत आर्थिक मोर्च पर लगातार झटके दे रहा है। एचडीएफसी से बाहर हो जाने के बाद अब इंडियन रेलवे ने अरबों रुपये का झटका एक साथ ही दे दिया है। ऐसा कहा जा रहा है कि रेलवे ने 44 सेमी हाई स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए चीन को मिले टेंडर को निरस्त करने का फैसला कर लिया है.

मिली जानकारी के मुताबिक चीनी सरकार के स्वामित्व वाली सीआरआरसी कॉरपोरेशन टेंडर में बोली लगाने वाली एकमात्र विदेशी कंपनी है। टेंडर को चेन्नई की इंटिगरल कोच फैक्ट्री ने जारी किया है। कुल मिलाकर छह प्रतिद्वंद्वी है जिसमें भारत हेवी इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रॉनिक, मुंबई में पावरनैटिक्स इक्विपमेंट्स और हैदराबाद का मेधा ग्रुप शामिल है। चीन की सीआरआरसी द्वारा लगाई गई बोली को डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रीयल एंड प्रमोशन की मेक इन इंडिया पॉलिसी में मौजूद एक क्लॉज के आधार पर रद्द किए जाने की उम्मीद है। 2017 के ऑर्डर में दिए क्लॉज के मुताबिक, अगर कोई नोडल मंत्रालय इस बात को लेकर संतुष्ट है कि चीज के भारतीय सप्लायर को किसी विदेशी सरकार द्वारा खरीद में भाग लेने या मुकाबला करने के लिए मंजूरी नहीं दी जा रही है, तो वह उपयुक्त लगने पर उस देश के बोली लगाने वालों पर उस आइटम या उस नोडल मंत्रालय सं संबंधित दूसरी आइटम को लेकर प्रतिबंध या उन्हें बाहर कर सकता है.

पॉलिसी के मुताबिक, बोली लगाने वाले को एक देश से होने को कुछ मानदंडों के आधार पर माना जाता है जिसमें से एक है कि इकाई की शेयरहोल्डिंग या प्रभावी कंट्रोल को उस देश से चलाया जा रहा है। चीनी सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी सीआरआरसी कॉरपोरेशन इस टेंडर में खरीदारी के लिए बड़ी प्रतिद्वंद्वी उभरी थी। 44 वंदे भारत ट्रेनों के लिए टेंडर को पिछले साल 100 करोड़ रुपये की लागत के साथ लॉन्च किया गया था और 35 करोड़ रुपये का संचालन शक्ति के कंपोनेंट के लिए थे। प्रोजेक्ट के लिए मौजूदा टेंडर को पिछले साल 22 दिसंबर को जारी किया गया था और यह शुक्रवार को खुला था। यहल तीसरा ऐसा टेंडर है, जिसे मेक इन इंडिया ट्रेनों के लिए जारी किया गया था।