सुहागिनों ने रखी पति की दीर्घायु के लिए तीज का व्रत

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पटना(अजित यादव): कोरोना वायरस के वैश्विक महामारी काल में भी सुहागिन महिलाओं ने नियमों का पालन करते हुए अखंड सौभाग्यवती का पर्व हरतालिका तीज शुक्रवार को राजधानी पटना सहित राज्य के तमाम जिलो में श्रद्धा पूर्वक एवं हर्षोउल्लास से मनाया गया । महिलाओं ने पति की दीर्घायु के लिए 24 घंटे का निर्जला व्रत रखा । इस अवसर पर कुंवारी युवतियों ने भी व्रत रखकर अच्छे वर की कामना की। सुहागिन स्त्रियां अपने सुहाग को अखण्ड बनाए रखने तथा अविवाहित युवतियों ने अपने मन मुताबिक वर पाने के लिए पूरे नेम-निष्ठा के साथ हरितालिका तीज का व्रत किया़ साथ ही भगवान शंकर व माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना व रात्रि जागरण किया़ सुहागिन महिलाएं व अविवाहित युवतियों ने पूरे नियम निष्ठा के साथ व्रत रखा़ दिन भर उपवास में रहने के बाद संध्याकाल में डलिया भरा गया तथा पूरे विधि-विधान से महिलाओं ने हरितालिका तीज की कथा सुनी़ वहीं देर रात तक भक्ति जागरण का दौर चलते रहा़ बताया जाता है कि सर्वप्रथम इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव शंकर के लिए रखा था. जिस कारण से इस दिन विशेष रूप से गौरीशंकर की ही पूजन-अर्चना की गयी़ व्रत करने वाली स्त्रियां सूर्योदयकाल से पूर्व ही जग गयी तथा नहा धोकर पूरा श्रृंगार करके पूजन के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरीशंकर की प्रतिमा स्थापित की. इसके साथ पार्वती जी को सुहाग का सारा सामान चढ़ाया गया़.

करवाचौथ से भी कठिन है तीज-

कथा के दौरान बताया गया कि एक बार इस व्रत रखने बाद जीवन पर्यन्त इस व्रत को रखना पड़ता है. यदि व्रती महिला गंभीर रोगी हालात में हो तो उसके बदले में दूसरी महिला या उसका पति भी इस व्रत को रख सकने का विधान है. वैसे तो उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बिहार में मनाया जाने वाला यह त्योहार करवाचौथ से भी कठिन माना जाता है क्योंकि जहां करवाचौथ में चांद देखने के बाद व्रत तोड़ दिया जाता है. वहीं इस व्रत में पूरे दिन निर्जल व्रत किया जाता है और अगले दिन पूजन के पश्चात ही व्रत तोड़ा जाता है. इस व्रत से जुड़ी एक मान्यता यह है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां पार्वती जी के समान ही सुख-पूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं.

व्रत करने वाली महिलाओं ने कहा कि हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जाती है। साथ में भगवान गणेश की भी पूजा होती है ताकि उनका व्रत बिना किसी विघ्न-बाधा के पूर्ण हो जाए।