सुबह 6 बजे से विकास दुबे की रोज लगती थी अदालत- ‘जज’ बनकर खुद सुनाता था फैसला!

कानपुर(न्यूज़ क्राइम 24): अपराध की दुनिया में अपना नाम कमाने वाले विकास दुबे की की दुनिया अलग ही थी. कानपुर जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पढ़ने वाला एक मामूली सा छोटा गांव विकरु जिसकी आबादी 4 से 5000 होगी. इस गांव में रहने वाली 80 वर्ष की श्यामा देवी ने बताया कि 1995 के बाद इस गांव में बने विकास दुबे के आलीशान घर के बाहर मैदान में एक अदालत लगती थी, जिसमें न्यायधीश कुख्यात अपराधी विकास दुबे बनता था. इस अदालत की सुनवाई सुबह 6:00 बजे शुरू होती थी जहां एक कुर्सी में कुख्यात अपराधी बैठता था.

बगल में दो बंदूकधारी एक दर्जन लट्ठ लेकर लोग खड़े रहते थे. विकास दुबे की अदालत में आने वाले पीड़ितों की माने तो विकास उनकी मदद तो करता था लेकिन कई ऐसे आरोप भी है जहां विकास ने मदद के नाम पर लोगों की जमीने भी हड़प ली थी. गांव में कुछ परिवार तो विकास का नाम सुनकर उसके पैरोकार बन रहे हैं. लेकिन ज्यादातर परिवारों का हाल ही है उससे बात करने की कोशिश करो तो विकास का नाम सुनते ही हो डर से कांपने लगते हैं और भाग जाते हैं. यह हाल बुजुर्गों का नहीं बल्कि घर की बहुओं का भी है.

गांव की 32 वर्षीय सुमन ने बताया कि शादी के बाद से वह गांव में रह रही है. उसके दो बच्चे भी हैं. उसके नजरिए से विकास दुबे इतना बड़ा गुंडा है कि जैसे ही उसकी गाड़ी आती थी तो गांव के लोग अपने घरों में दुबक जाते थे. विकास की दहशत की वजह है कि अगर गलती से भी उसकी दो गाड़ियों के काफिले के सामने कोई आ गया तो उसे बिना ब्रेक लगाए टक्कर मार दी जाएगी, क्योंकि साहब वह गुंडा है. वह बदमाश है और पुलिस भी उसे पकड़ कर छोड़ देती है. और हम तो गरीब हैं. गांव की मिट्टी में पैदा हुए हैं हम मर भी जाए तो किसी को क्या फर्क पड़ता है।