सार्वजनिक दुर्गा मंदिर घुरना बाजार, यहां भक्तों की होती है मुरादे पूरी!

अररिया(रंजीत ठाकुर): पड़ोसी देश नेपाल सीमा सेट नरपतगंज प्रखंड के घुरना बाजार स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर की भव्यता व सुंदरता को लेकर आसपास के क्षेत्र सहित पड़ोसी देश नेपाल में भी चर्चित है यहां प्रत्येक दिन मां भगवती की पूजा अर्चना होती है किंतु शारदीय नवरात्र में यहां भव्य तरीके से मां दुर्गा की पूजा होती है एवं मेला भी लगाया जाता है। मंदिर ब्रिटिश काल की याद दिलाती है। इसकी प्रसिद्धि दूर दूर तक फैली हुई है। यह मंदिर घुरना बाजार की शान समझी जाती है। कमिटि के अध्यक्ष शम्भू प्रसाद गुप्ता, कोषाध्यक्ष पृथ्वीचन्द सोनी, सचिव अरूण साह के साथ साथ, बिनोद ठाकुर, मुकेश साह ,शोभानंद पाल, दीपक गुप्ता, कमल गुप्ता, पवन साह,चंदन साह, मनोज पासवान आदि माँ भगवती की सेवा व मंदिर में अपना योगदान दे रहे हैं l covid 19 महामारी को देखते हुए सरकार के निर्देशानुसार मास्क का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया है l निर्देषों का पालन किया जा रहा हैं l इस मंदिर की प्रसिद्धि पडोसी देश नेपाल के कई क्षेत्रों में पहुंच गयी है.

मंदिर का इतिहास-

मंदिर के इतिहास के संदर्भ में ग्रामीण बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना 1937 ई० में हुई थी। सर्वप्रथम टीन के बने घर में हीं ग्रामीणों द्वारा भगवती की पूजा प्रारंभ की गयी थी। इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग सें मंदिर का पक्कीकरण किया गया। मंदिर का गुबंज सौंदयीकरण व प्रवेश द्वार पर धातु की सिंहवाहिणी भगवती की प्रतिमा हंसराज जैन, विजय जैन के योगदान से स्थापित किया गया। प्रत्येक वर्ष शारदीय नवरात्र में मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा अर्चना की जाती है.

वास्तुकला

गुंबज नुमाइश मंदिर में यूं तो बरसों से मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा की जाती रही है किंतु मंदिर कमेटी ने अब इसमें संगमरमर की दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने का मन बनाया है चारों तरफ लोहे की ग्रिल से गिरी इस मंदिर का मुख्य दरवाजा दक्षिण की ओर है। मंदिर के नीचे ले फर्श पर टाइल्स लगा हुआ है यहां सुबह शाम पुजारी हीरा झा के द्वारा पूजा किया जाता है.

पूजा विधान-

इस मंदिर में कलश स्थापना एवं माता शैलपुत्री के पूजा के साथ शारदीय नवरात्र आरंभ होता है खास यह है कि इस मंदिर में पशुओं की बलि नहीं दी जाती है सात्विक तरीके से यहां पूजा संपन्न होता है यहां के पुजारी सप्तमी को बेल के वृक्ष के नीचे जाकर बेल के पेड़ को न्यौता देते हैं उसके बाद विधि-विधान से दूसरे दिन उसे उस बेल को मंदिर लाया जाता है भारी मात्रा में लाल एवं उजले रंग के फूलों से भगवती की पूजा की जाती है। पूरी क्षेत्र के लोग बैंड बाजा के साथ बेल तोड़ने के लिए जाते हैं.

कहते है कमिटि के अध्यक्ष-

शम्भू प्रसाद गुप्ता कहते हैं कि नवरात्र के दिनों में पडोसी देश नेपाल के श्रद्धालुगण भी भारी संख्या में पूजा अर्चना करने आते हैं इस मंदिर के पूजारी कभी नमक का सेवन नहीं करते हैं। कोविड19 के कारण पिछले साल की अपेक्षा इस बार पूजा पंडाल का आयोजन नही किया जाएगा l हर वर्ष कि तरह इस वर्ष यहां भक्ति जागरण का भव्य कार्यक्रम नहीं किया जाएगा l यहां हर दिन सैकड़ों की संख्या में नेपाल के श्रद्धालु एवं स्थानीय श्रद्धालु पहुंचते हैं छोटे-छोटे बच्चे हर दिन शाम के समय दीप जलाने के लिए पहुंचते हैं।

कहते हैं मंदिर के पूजारी-

मंदिर के पूजारी हीरा झा कहते हैं कि इस मंदिर में साक्षात विराजमान भगवती दुर्गा माता की कृपा से यहां आने वाले भक्तों की सारी मनोकामनाएँ पूरी होती है। धार्मिक पुस्तक के अनुसार शप्तशती पाठ व मंत्रोच्चार के साथ भगवती की पूजा पाठ की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में प्राचीन एवं अति प्राचीन मंदिरों में इस मंदिर का विशेष ममहत्व है.

लोजपा जिला उपाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा जो सच्चे मन से मां से मन्नत मांगते हैं उसे जरूर पूरा होता है।