वर्षों से उपेक्षित है नबाबगंज का अतिरिक्त प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र

अररिया(रंजीत ठाकुर): लगभग 60 वर्ष पूर्व 1955 में बने नबाबगंज अतिरिक्त प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। केवल कुछ कर्मियों के भरोसे इस अस्पताल के पुराने जर्जर भवन में मरीजों का इलाज होता है।इस अस्पताल में कभी स्थाई रूप से कोई डॉक्टर नहीं रहते हैं. लगभग 10 वर्षों से नया बना अधूरा भवन अपने पूर्ण होने की बाट जोह रहा है।लाखों रुपये कि लागत से खरीदा गया जेनरेटर खुले आसमान के नीचे सड़ रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र के तकरीबन पांच पंचायत के लाखों लोगों के लिए यह मात्र एक अस्पताल है। यदि कोई साधारण रूप से बीमार हो तो उन्हें नरपतगंज या फारबिसगंज के अस्पताल का सहारा ही लेना पड़ता है । जिला चिकित्सा पदाधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधियों के समक्ष सभी लोगों ने इस गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान आकृष्ट कराया परंतु किसी ने इसमें कोई रुचि अब तक नहीं दिखाई बताते चलें कि नवाबगंज पंचायत के फुलकाहा बाजार में प्रतिदिन हजारों लोगों का आना जाना लगा रहता है। स्वास्थ्य केंद्र का शुचारु रूप से संचालन नहीं होने से ग्रामीण झोला छाप डॉक्टरों से इलाज को मजबूर हैं.

कितने सांसद तथा विधायक बदल गए,परन्तु इस अस्पताल की तकदीर व तस्वीर नहीं बदली।इस अतिरिक्त उप स्वास्थ्य केंद्र को कुल 1.25 एकड़ अपनी निजी जमीन है। इसके बावजूद इस अस्पताल पर बिहार सरकार ने भी अपनी आंखें बंद कर रखी है। चुनाव आता है तो नेता चुनावी वादे कर फिर उसे भूल जाते हैं। यहां की जनता नेताओ के आश्वासन से खुद को ठगा महसूस कर रहे है.

इस अस्पताल के करीब 50 मीटर की दूरी पर फुलकाहा थाना है, जहां कई बार किसी घटना-दुर्घटना की स्थिति में आघात रिपोर्ट(इंज्यूरी रिपोर्ट)की जरूरत होती है और यहां अस्पताल होते हुए भी उन्हें मजबूरी में नरपतगंज स्वास्थ्य केंद्र ही जाना पड़ता है। सरकार विकास की बात करती है।सड़क बिजली पानी के साथ ही स्वास्थ्य भी विकास का आधार है। पूर्व में कई बार यहां डॉक्टरों की पदस्थापना भी हुई,लेकिन अल्प समय के लिए। इस अस्पताल में एक्सरे तक की भी सुविधा नहीं है।