माँ चंडी के दर्शन से होती है सब मुरादें पूरी, पढ़े पूरी खबर..!

नवादा(अवध भारती): जिले के काशीचक प्रखंड मुख्यालय से एक किलोमीटर उत्तर चंडीनोवां गांव स्थित चंडिका मंदिर में विराजमान माता के दर्शन मात्र से मुंहमांगी मुरादें पूरी होती है यही कारण है कि सालोभर माता के दर्शन करने आने वाले भक्तों का ताँता लगा रहता है नवरात्री के दिनों में माता से मुरादें मांगने बालों संख्या बढ जाती है । माता के स्थापना के संबंध में दो किद्वंती है.

बुज़ुर्ग बताते हैं कि तक़रीबन दो सौ साल पूर्व पोखर किनारे उक्त स्थल पर माता की प्रतिमा स्वतः प्रकट हुई थी वही कुछ लोगों का कहना है कि काशीचक बाजार से सटे मधेपुर गांव स्थित चैनल नदी के किनारे मांता की प्रतिमा थी जहां माता का पुजा सही से नही हो पा रहा था तब मांता ने चंडीनावां गांव के लोगों को स्वप्न दीए और उसी समय चंडीनावां के लोगों ने माता को उक्त स्थल से लाकर स्थापित किया उसके बाद गांव का नामाकरण भी माता के नाम से हो गया यह भक्ति में लीन लालितपुरी बाबा को माता ने स्वप्न में भक्तों के कल्याणार्थ सहज आराधना व् पाठे की बलि का आदेश दिया चंडिका के नाम पर ही गांव का नामकरण चंडीनोवां हो गया । हाल के दिनों मे श्रद्धालुओं के आर्थिक सहयोग से प्रतिमा स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है! मंदिर के गर्भगृह में ही गांव का शिड-पिंड स्थापित है । शिडा-पिडा रहने के कारण दशहरा पुजा मे मंदिर के अलावे किसी भी ग्रामीण के घर कलश स्थापित नहीं किया जाता है , फलस्वरूप नवरात्री में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने वाले लोगों को नौ दिन मंदिर परिसर में ही रहना पड़ता है । गांव में शादी , मुण्डन व् उपनयन जैसे हर शुभ कार्य में दो पाठा एक पाठी माता को बलि चढ़ाने की प्रथा रही है जो अनवरत जारी है । साठ के दशक में रामनुरागी वैष्णव संत श्री झुंनकिया बाबा ने ग्रामीणों से माता की बलि के नाम पर सैकड़ो बेजुबान पशुओं की अकारण हत्या बंद करने का ग्रामीणों को कहा । मगर चंडिका के प्रभाव से भयभीत ग्रामीणों ने बाबा से खुद मंदिर जाकर आग्रह करने का प्रस्ताव रखा । चंडिका से बलि न लेने का आग्रह करने चले उलटा खटिया पर बैठ कर झुंनकिया बाबा जैसे-जैसे मंदिर की ओर बढ़ते जाते उनका शरीर ताप से जलने लगा । माता के प्रताप से बाध्य होकर उन्होंने मंदिर के सामने स्थित तालाब के पास ही रुक कर माता को वही से प्रार्थना कर छमा याचना कर गांव बालों को मांता के नही मानने की बात कह गांव स्थित ठाकुरबाड़ी लौट गए.

बलि प्रदान नहीं करनेवाले लोगो पर मां आती है गुस्से में-

ग्रामीण माता के पुजारी महंत सिद्धेश्वर सिंह के संबंध में ग्रामीण रौशन कुमार, राजीव कुमार, नवल सिंह, कंचन सिंह, सरोज देवी बताते हैं कि जब पुत्री की शादी कर रहे थे तो उन्होंने मांता को वैष्णव होने की बात कह मां के मंदिर में उन्होंने बलि नही दिया जिसका सीधा असर उन्हें तुरंत देखने को मिला। लड़का पक्ष के लोग बरात लेकर काशीचक स्टेशन पे जैसे ही पहुंचे लड़के को दस्त होना शुरू हो गया । आसपास के सभी चिकित्सकों ने अपने क्षमता के अनुरूप इलाज कर लडके को ठीक करने के लिए हर तरह का उपाय किया , लेकिन दस्त रुकने का नाम नहीं ले रहा था । और चिकित्सकों ने उन्हें बाहर ले जाने की बात कहा यह बात गांव मे आग के तरह फैल गया और गांव मे चर्चा का विषय बन गया, साथ ही साथ कानाफूसी भी शुरू हो गया ,जब यह जानकारी लड़की की मां को हुई तो उन्होंने मां के दरबार में जाकर क्षमा याचना मांगी और तीन कि जगह 6 बलि देने की बात कहीं और कुछ ही देर के बाद लड़के का दस्त रुक गया और लड़का ठीक हो गया । जब यह जानकारी लड़के के पिता को हुई तब उन्होंने भी 3 के जगह 6 बली प्रदान करने की बात कहीं तब से चंडीनावा गांव में एक व्यक्ति भी शाकाहारी नहीं रहा । नवरात्री में नौकरी , रोगमुक्ति , औलाद और मुक़दमे में जीत की मन्नतें magte hai aur मुराद पूर्ण होने पर दुर्गा पाठ karte है । वही हजारों लोग यहाँ अपनी मन्नतें मांगने के लिए आते है । माँ के दरबार से कोई ख़ाली नहीं जाता माता सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।