बैंकों की मनमानी से खुदरा व्यापारी परेशान!

न्यूज़ क्राइम24 डेस्क: बैंकों ने एक तुगलकी फरमान निकाल कर 1 नवंबर से व्यापारियों द्वारा बैंक में जमा कराए जाने वाली नगद के ऊपर बैंक चार्जेस लगाने का फरमान जाहिर कर दिया है यह सिर्फ अनैतिक ही नहीं बल्कि न्याय संगत भी नहीं है ऐसा भाव कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स बिहार इकाई के अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने कहा. वे आज बैंक आफ बडौदा, डाक बंगला ब्रांच के एजीएम श्री टब्रेज हैदर जी से मिल कर बैंक द्वारा लिए गए इस निर्णय का कैट बिहार की तरफ से विरोध कर रहे है।

कैट बिहार के अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि आज पूरे देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों से स्पर्धा में खुदरा व्यापारी परेशान है। उसके ऊपर किसी न किसी रूप में एक के बाद एक समस्या आ रही है। 1 नवंबर से अनेक प्रकार के बदलाव किए जा रहे हैं। उसमें सबसे बड़ा बदलाव है की बैंकों में पैसे नगद जमा कराने पर और नगद निकालने पर बैंक कमीशन लेगा। यह अजीबोगरीब फरमान हमारे देश के बैंकों द्वारा लागू किया जा रहा है।

पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने दामोदरन कमेटी का हवाला देकर बैंक अपने ग्राहक से अधिकतम कितने रुपए वसूल कर सकता है उसकी सीमा तय की गई थी। अब वह सीमा समाप्त हो गई है यह बात कैट महासचिव डा रमेश गांधी ने कहा । एक तरफ भारत सरकार यह चाहती है की व्यापारियों को व्यापार करने में सुविधा हो और सरकार यह भी चाहती है कि व्यापारी अपना खर्च चेक द्वारा करें।

कैट बिहार चैप्टर के चेयरमैन कमल नोपानी व वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश नन्दन जी ने कहा कि खुदरा व्यापारी का संपर्क सीधा उपभोक्ता से आता है। उपभोक्ता बाजार में नगद खरीदारी करते हैं। ऐसे में व्यापारियों की बिक्री का पैसा नगद में जमा होता है। व्यापारी अपना माल खरीदता है उसका भुगतान चेक से करना चाहता है। इसलिए बिक्री के पैसे उसे बैंकों में जमा कराना अनिवार्य है। व्यापारी बैंकों से जितना ज्यादा कार्य करेगा उतनी ज्यादा अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। इस प्रकार के बैंक चार्जिंग लगाकर बैंक एक तरीके से खुदरा व्यापारियों को बैंकों में पैसे जमा कराने से रोक रहा है। बैंकों द्वारा इस प्रकार के बैंक चार्जा लगाने से बाजारों में नगदी व्यवहार ज्यादा से ज्यादा होने लगेगा। इससे अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। जीएसटी के संकलन के ऊपर भी असर आ सकता है।

अशोक कुमार वर्मा ने अनुरोध किया है कि इस निर्णय को बैंक को वापस लेने के लिए सरकार बैंकों पर दबाव बनाए। अगर इस प्रकार के बैंक चार्जेस चालू रहे तो हो सकता है कैट आंदोलन की भूमिका में सामने आए और कैट अपने व्यापारीयों का खाता भी दूसरे बैंक मे खोलने का अनुरोध कर सकती है। कमल कुमार नोपानी चेयरमैन, अशोक कुमार वर्मा अध्यक्ष, डा रमेश गांधी महासचिव, मुकेश नन्दन वरिष्ठ उपाध्यक्ष, टी आर गांधी संरक्षक, प्रिंस कुमार राजू पटना प्रमण्ल अध्यक्ष व आर सी मेलहोत्रा सचिव मौजूद हुए ।