बिहार सरकार द्वारा इस सर्वोच्च सम्मान के लिए कुल 37 कलाकारों का चयन

पटना(अजित यादव): कला संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार ने बिहार कला पुरस्कार के लिए कलाकारों के नाम की घोषणा कर दी है बिहार सरकार द्वारा लगभग दो दर्जन पुरस्कारों के लिए नाम तय कर दिए गए हैं | बिहार सरकार द्वारा इस  सर्वोच्च सम्मान के लिए कुल 37 कलाकारों का चयन किया गया हैं, जिसमें प्रदर्शन कला को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने वाले खगौल रंगमंच के चर्चित रंगकर्मी,निर्देशक,आयोजक,युवाओं के प्रेरणा स्रोत एवं सूत्रधार के महासचिव अधिवक्ता नवाब आलम भी शामिल हैं | इससे खगौल सहित पूरे बिहार के सांस्कृतिक जगत में हर्ष व्याप्त है | श्री आलम पिछले 40 सालों से खगौल कस्बे से रंगमंच की शुरुआत कर नाटकों को प्रदेश एवं राज्य स्तर पर सम्मान दिलाया है एवं अभिनेता एवं निर्देशक के रूप में बिहार एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है तथा वर्तमान में कई सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं शिक्षण संस्थाओं एवं सरकारी विभागों से संबंध है | इन्होंने न केवल खगौल रंगमंच पर अपनी सक्रियता दिखाई है बल्कि राजधानी पटना के साथ-साथ दूसरे प्रांतों में भी कला को प्रदर्शित किया है और राष्ट्रीय स्तर के निर्देशकों यथा शोकेष सान्याल (इलाहाबाद), बृज बल्लभ मिश्र (दिल्ली), अनिल ठाकुर (रांची), सरूर अली अंसारी (पटना) एवं अन्य के साथ गतिविधियों में भाग लेकर अपने दायित्व का निर्वहन किया है । इन्होंने लगभग एक सौ से भी अधिक नाटकों में अभिनय एवं निर्देशन किया है जिसमें पोस्टर कुंभनिद्रा, महाभोज, द ग्रेट मास्टर थिएटर कंपनी, गधे की बारात, वो दिन दूर नहीं, लड़ाई, इतिहास चक्र, भिखारी का नाच, परदेसी बाबु, अप्प दीपो भव:, कथा गुड बाय, स्वामी, जुलूस, इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर, शंबुक की हत्या, तलाश अर्जुन की, पागल, मंदिर मस्जिद, बापू की हत्या हजारवीं बार, बारात कब आएगी, राम-रहीम, अंधेर नगरी, बदलते चेहरे, जहन्नुम एक्सप्रेस, आंख बंद डिब्बा गोल, जनता पागल हो गई, समरथ को नहिं दोष गुसाईं, ईश्वर अल्लाह तेरो नाम आदि शामिल है |  इनकी उपलब्धियों में खगौल में “फ्रांस महोत्सव” एवं “उत्तर मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र केंद्र”, इलाहाबाद के सौजन्य से खगोल में 14 दिवसीय रंग-कार्यशाला आयोजित कराने का श्रेय भी जाता है | श्री आलम ने भगत सिंह के उपदेशों को आम-जनता, स्कूली बच्चों तक पहुँचाने के उदेश्य से चर्चित कथाकार एवं पत्रकार कमलेश के आलेख “भगत सिंह फाँसी की काल कोठरी से” की दो दर्जनों से भी अधिक प्रस्तुति विभिन्न स्थानों पर करके उल्लेखनीय कार्य किया हैं | श्री आलम वकालत जैसे व्यस्त पेशे में होने के बावजूद भी नाटकों के लिए पूरा वक्त निकाल लेते हैं |  आज भी श्री आलम उसी जोशो-खरोश के साथ रंगमंच पर अभिनय करते हैं जैसे कोई नया अभिनेता करता है | हमेशा सीखना ही उनकी फितरत में शामिल है | 31 दिसंबर 1967 को ग्राम- जमालुद्दीन चक (खगौल) में जन्मे नवाब आलम 1980 से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय हैं.

इसके अलावा पर्यावरण, साक्षरता, कानूनी सलाह, सांप्रदायिक सौहार्द, राजनीति एवं अन्य सामाजिक कार्यों में भी नवाब आलम बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. देश के सभी प्रतिष्ठित साहित्यकारों, लेखकों, नाटककारों की रचनाओं एवं उनकी प्रासंगिकता पर हमेशा कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भी श्री आलम जाने जाते हैं. श्री आलम ने पत्रकारिता से बैचलर ऑफ जौनलिज्म भी किया है और विभिन्न समाचार पत्रों यथा नवभारत टाइम्स (पटना/दिल्ली), हिंदुस्तान (पटना), दिनमान टाइम्स (दिल्ली), आज, जनशक्ति(पटना), कदाम्बनी(दिल्ली), हिंदी मासिक पत्रिका, आजकल(दिल्ली), हिंदी साप्ताहिक हिंदुस्तान(दिल्ली) में कला समीक्षक एवं संवाददाता के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई है, लेकिन अब वह पत्रकारिता के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं नाटकों के लिए उनकी सक्रियता आज भी नए रंगकर्मियों में उत्साह का संचार करती है।