बाघमारा रेलवे फाटक : सुबह हो या शाम, जाम ही जाम!

बाघमारा: सुबह हो या शाम। जाम ही जाम। जी हाँ यह गीत नहीं बल्कि हकीकत है। यह बार-बार जाम लगने वाली तस्वीर बाघमारा से डुमरा जाने वाले मार्ग से जाने या फिर आने के दौरान खुद-ब-खुद सामने आ जाती है। एक बार रेलवे का फाटक गिरा। फिर तो 20-25 मिनट आप अपने वाहन के साथ जबरदस्ती फसे रहिये। बस इधर-उधर ताकते रहिये। इसके साथ ही कभी रेलवे तो कभी यहां के जन-महानुभाओ या फिर कलमघिस्सू को कोसते रहिये। इसके अलावा और कोई उपाय नहीं है। थोड़ी देर बाद फाटक खुला, फिर तो आप अपने वाहन से फ्राटेदार अन्दाज़ में ऐसे निकल पड़ते है। मानों मैराथन दौड़ में भाग ले रहे है। फिर तो वह व्यवस्था को कोसना-फोसना जब वापस फाटक के पास खड़े रहने का मौका मिला तो याद आएगा। रहा सवाल फाटक में कोई पूल चाहे ऊपर बने या फिर नीचे। यह संभव तभी लगेगा। जब पूल बनता दिखेगा। बाकी रेलवे के बड़े-बड़े अधिकारियों एवं जन-महानुभाओ का आश्वाशन भरा पूल तो, श्रीमान ऐसा पूल तो कई बार बन चुका है। हां एक बात तो भूल गए। जब धनबाद में गया पूल में लगने वाले जाम का अभी तक निदान नहीं हो पाया है, तो बाघमारा का नंबर तो बाद में ही आता है। चलिए मैने अपनी कुछ बातें लोगों को इस समस्या से जूझते देखकर आप सभी के बीच शेयर किया है। कुछ आप भी कहिये।