पीएम मोदी 3 अक्टूबर को करेंगे दुनिया के सबसे लंबे टनल का उद्घाटन, जानिए- सेना के लिए कैसे वरदान होगा अटल टनल

नई दिल्ली(न्यूज़ क्राइम24): लद्दाख में एलएसी पर भारत चीन के बीच तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। आने वाले सर्दी में अब भारतीय सेना माइनस 50 डिग्री से नीचे की एलएसी पर चीन के साथ लोहा लेने को तैयार है तो भारतीय सेना तक रसद पहुंचाने के लिये ऐसा रास्ता खुलने जा रहा है जिससे चीन की चिंता बढ़ गई है। 3 अक्टूबर यानि शनिवार को 10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश के रोहतांग पास के नीचे दुनिया के सबसे लंबे नवनर्मित हाईवे टनल ‘अटल टनल’ का उद्घाटन करेंगे। मनाली में टनल के साउथ पोर्टल तरफ उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के बाद लाहौल स्पीति के सिस्सु और सोलांग वैली में भी कुछ स्थानीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री शिरकत करेंगे। 9.02 किलोमीटर लंबा अटल सुंरग अब पूरे साल मनाली को लाहौल स्पीति के साथ जोड़ कर रखेगा। पहले ये घाटी भारी बर्फबारी के चलते साल में 6 महीने तक आने जाने के लिये बंद रहता था। पर अब ये 24 घंटे और 12 महीनों चालू रहेगा। हिमालय के पीर पंजाल क्षेत्र में समुद्र से 10,000 फीट की उंचाई पर बना अटल टनल बहुत ही आधुनिक तकनीति के साथ बनाया गया है। आपको बता दें ये सुरंग को चालू होने के बाद मनाली और लेह की दूरी जहां 46 किलोमीटर कम हो जायेगी वहीं मनाली से लेह जाने में अब 4 से 5 घंटे कम लगेंगे। अटल टनल का साउथ पोर्टल मनाली से 25 किलोमीटर की दूरी पर करीब 3060 मीटर की उंचाई पर स्थित है वहीं टनल का उत्तरी छोड़ लाहौल घाटी के सिस्सु के तेलिंग गांव में 3071 मीटर की उंचाई पर स्थित है। अटल टनल में 3000 कारें और 1500 ट्रक प्रतिदिन सफर कर सकेंगी जिसकी अधिक्त्तम रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे होगी।

अटल टनल में स्टेट ऑफ आर्ट एलक्ट्रोमैकेनिकल सिस्टम के तैयार किया गया है जिसमें सेमी ट्रासवर्स वेंटिलेशन सिस्टम, SCADA कंट्रोल फायर फाइटिंग, इल्युमिनेशन एंड मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल है।
अटल टनल में सुरक्षा के कई खास फीचर्स हैं जिसमें टनल के दोनों छोड़ पर एंट्री बैरियर्स लगाया जाएगा। सुंरग के भीतर हर 150 मीटर की दूरी पर इमरजेंसी के लिये टेलीफोन कनेक्शन की सुविधा होगी। 60 मीटर की दूरी पर फायर हाईड्रैंट मैकेनिज्म से लैस होगा। हर 250 मीटर की दूरी पर सीसीटीवी कैमरा लगा होगा जो ऑटो इनसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम से लैस होगा।
सुरंग में हर एक किलोमीटर की दूरी पर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग की जाएगी। ईवैकुएशन लाईटिंग एक्जिट साइन हर 25 मीटर की दूरी पर लगा होगा। टनल में हर तरफ ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम होगा। हर 50 मीटर की दूरी पर फायर रेटेड डैमपनर्स और हर 60 मीटर की दूरी पर कैमरा लगा होगा।
रोहतांग पास के नीचे इस एतिहासिक सुंरग को बनाने का फैसला तात्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 3 जून 2000 को लिया था। 26 मई 2002 को इस सुरंग का शिलान्यास किया गया। बार्डर रोड आर्गनाइजेशन बीआरओ बेहद कठिन चुनौतिपूर्ण हालात और प्रतिकूल मौसम के बावजूद लगातार इस सुंरग को बनाने की दिशा में काम करती रही। जिसमें सबसे कठिन था 587 मीटर सेरी नालाह फॉल्ट जोन को तैयार करना। जिसे 15 अक्टूबर 2017 को पूरा किया गया।
24 दिसंबर 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में रोहतांग टनल को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया था।