नवादा के रजौली विधानसभा सीट पर होगा महासग्राम, बागी उम्मीदवार बिगाड़ सकते हैं पूरा खेल!

नवादा(अवध भारती): रजौली सुरक्षित विधानसभा इस बार महाघमासान का अखाड़ा बनने जा रहा है। कम से कम प्रत्याशियों के नामांकन से तो ऐसा ही लगता है। जिले में सर्वाधिक 23 नामांकन इसी सीट पर हुआ है। लड़ाई को दिलचस्प बनाने में दोनों प्रमुख गठबंधनों के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनावी मैदान उतरे बागी उम्मीदवार बनेंगे। महाघमासान की पृष्ठभूमि तैयार करने में भाजपा से टिकट के प्रबल दावेदारों में शुमार अर्जुन राम, राजद की प्रेमा चौधरी और चार बार विधायक बन चुके बनबारी राम प्रमुख हैं। वैसे, अभी नामांकन वापसी की तारीख आना शेष है। इसके बाद ही पता चल पाएगा कि बगावत की आंच कहां तक बनी रहती है। सभी दलों के नेता बागी उम्मीदवारों को मनाने में जुटे हैं। वार्ता जारी है
रजौली विधानसभा 1962 के चुनाव तक सामान्य सीट रहा था। चुनाव आयोग के साइट पर उपलब्ध ब्योरा के अनुसार 1957 से 62 तक के तीन चुनाव में यहां से कांग्रेस के रामस्वरूप यादव जीते थे। 67 के चुनाव में यह सीट आरक्षित हो गई। तब से अबतक करीब 53 साल से यह सीट आरक्षित है। आरक्षित सीट से 67 में हुए चुनाव में यहां से शांति देवी कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुई। बाद में दौर में जनसंघ, कांग्रेस, जनता पार्टी, भाजपा, जनता दल, राजद, भाजपा को जीत मिलती रही। खुद की ताकत के बदौलत निर्दलीय बाबू लाल चौधरी व बनबारी राम निर्दलीय भी चुनाव जीते है. सुरक्षित होने के बाद से इस सीट पर चार बार बनबारी राम व इतने ही बार स्व. बाबू लाल चौधरी को जीत मिली है। रिकार्ड यह भी बताता है कि सुरक्षित होने के बाद सिर्फ बनबारी राम व बाबू लाल चौधरी ही एक से अधिक बार यहां से जीत सके हैं। बाबू लाल अब दिवंगत हो चुके हैं, जबकि बनबारी राम फिर से चुनावी अखाड़े में हैं.

रजौली विधानसभा से अबतक के विधायक-

1957,1959,1962-रामस्वरूप प्रसाद यादव-कांग्रेस
1967- शांति देवी-कांग्रेस
1969-बाबू लाल-जनसंघ
1972-बनवारी राम-कांग्रेस
1977-बाबू लाल-निर्दलीय
1980- बनवारी राम- जनता पार्टी
1985-बनवारी राम-निर्दलीय
1990-बाबू लाल-भाजपा
1995-बाबू लाल-जनता दल
2000-राजाराम पासवान- राजद
2005(फरवरी)नंद किशोर चौधरी-राजद
2005(अक्टूबर) बनवारी राम- भाजपा
2010- कन्हैया रजवार-भाजपा
2015- प्रकाश वीर – राजद