नवरात्र में मां के नौ स्वरूपों का पूजन मनोकामनाएं पूर्ण करता है : महंत राज

तलवाड़ा(प्रवीण सोहल): मंदिरों में नवरात्र का पावन पर्व मनाने की तैयारी जोरों पर है। मां कामाक्षी दरबार कमाही देवी के महंत राज गिरि महाराज ने धर्मचर्चा करते हुए उक्त बात कही. उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर से नवरात्र शुरू होंगे। शास्त्रों का मत है कि तिथि क्षय हो तब भी उसी दिन को नवरात्र की शुरुआत होगी। 25 अक्टूबर तक नवरात्र चलेंगे। सभी मनोकामनाओं की पूर्ती के लिए नवरात्र में मां के नौ रूपों का पूजन किया जाता है। देवी भगवती प्रसन्न होकर भक्तों की कामनाएं पूर्ण करती है। पहले दिन शैलपुत्री का पूजन किया जाता है। यह देवी सभी जीवों की रक्षा करती हैं। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है, सभी विद्याओं की दात्री ब्रह्मचारिणी को समस्त विद्या की प्राप्ति हेतु पूजा जाता है। तीसरे दिन देवी के चंद्र घंटा रूप का पूजन होता है। यह देवी ज्ञान का स्वरूप और भक्तों का कल्याण करने वाली हैं। चतुर्थ दिन देवी के कुष्मांडा रूप की आराधना की जाती। यह देवी भक्तों के रोग, शोक और कष्टों का नाश करके यश, आयु बल बुद्धि प्रदान करती हैं। पांचवें नवरात्र के दिन देवी के स्कंदमाता रूप का पूजन किया जाता है, देवी का यह रूप कल्याणकारी माना जाता है। छठे दिन देवी के कात्यायनी रूप की अर्चना की जाती है, यह देवी पाप का नाश करती हैं। सातवें दिन मां कालरात्रि का पूजन होता है, यह देवी का रूप दुष्टों और पापियों का नाश करने वाला होता है। आठवें दिन देवी के महागोरी का पूजन होता है। यह रूप पापों का नाश करके धन वैभव और सुख शांति देने वाला है। नवम दिवस देवी के सिद्धिदात्री रूप की उपासना होती है, यह देवी सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली हैं। नवरात्र में श्रद्धापूर्वक देवी पूजन के अनंत लाभ हैं। इस लिए श्रद्धालुओं को पूरी आस्था से मां का पूजन करना चाहिए।