छठ महापर्व को लेकर घाटों की साफ-सफाई एवं पर्व की तैयारी जोरों पर!

अररिया(रंजीत ठाकुर): संतान तथा उसके सुखी जीवन की कामना और सूर्य उपासना का महापर्व छठ 18 नवंबर से प्रारंभ हो गया है। चार दिवसीय छठ पूजा का आगाज नहाय-खाय से होता है। 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत में छठ मैया तथा सूर्य देव की पूजा विधि विधान से की जाती है। इस पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने का बड़ा महत्व है। सूर्य को अर्घ्य देने के बिना छठ पूजा पूर्ण ही नहीं हो सकती है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, छठ व्रत वर्ष में दो बार होता है पहला चैत्र शुक्ल षष्ठी को तथा दूसरा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को। कार्तिक शुक्ल षष्ठी की छठ पूजा दिवाली के 6 दिन बाद और अंग्रेजी कैलेंडर के अक्टूबर या नवंबर माह में पड़ती है। दिवाली के बाद वाली छठ पूजा का लोक महत्व ज्यादा है। छठ पूजा को डाला छठ, छठी माई, छठ माई पूजा और सूर्य षष्ठी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इसी क्रम में भरगामा प्रखंड क्षेत्र के चर्चित शंकरपुर छठ घाट पर तैयारी जोरों-शोरों से चल रही है। छठ घाट की साफ सफाई में जुटे युवक मनीष सिंह,प्रिंस सिंह,अभिषेक सिंह,आशिष सिंह,नितिन सिंह,दीपक सिंह,जीवन सिंह,रोशन सिंह,नवनीत सिंह आदि ने बताया कि इस छठ घाट पर हमारे पूर्वज से ही छठ होता रहा है। और यहां हर वर्ष बड़ी धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ सैकड़ों छठ व्रती तथा हजारों दर्शक छठ करने एवं देखने आते हैं.यहां के छठ घाटों का बहुत बड़ी मान्यता है। इसीलिए हजारों की संख्या में दर्शक छठ देखने आते हैं।