केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र परिसर में भरा कई इलाके के नाला का पानी एवम वर्षा का जल जमाव!

पटना(अजित यादव): पटना के केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र का परिसर वर्षा के जल जमाव के साथ ही आस पास के कई मोहले टोले व कॉलोनियों के नाले का पानी से पुरी तरह झील बना हुआ है जिससे कृषि वैज्ञानिकों को अनुसंधान कार्य मे परेशानी हो रही है । कृषि पदाधिकारी एवम आलू अनुसंधान केंद्र के केंद्राध्यक्ष डॉ शम्भू ने बताया कि रुक रुक कर कई दिनों से हो रहे मूसलाधार बारिश से जहां जगह-जगह जल जमाव हो गया वहीं परिसर के चहारदीवारी टहल टोला के तरफ से टूटा हुआ है एवम चहारदीवारी के नीचे से पानी रिसकर परिसर में आर है जिससे किनारे वाला हिस्सा भी झील बन गया है। इसके अलावा अनुसंधान के लिये बनाये गए एरिया में भी बरसात का पानी लबालब भरा हुआ है। पहले बिड़ला कोलोनी टहल टोला महुआबाग उफरपुरा आदि आस पास के इलाके का ड्रेनेज का पानी परिसर के बाहर और भितर टूटे नाले से होकर बीएमपी शिव मंदिर के पास पुलिया से निकल जाता था लेकिन इस बार टूटा नाला टूटी चहारदीवारी और शिव मंदिर बीएमपी के पास पुलिया के पास अतिक्रमण कर अवैध निर्माण के चलते पानी नही निकल पा रहा है जिससे परिसर में जल भराव से भारी परेशानी हो रही है।
कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों को यहाँ अनुसंधान केंद्र से बारीश के पानी निकलने का इंतजार है ताकि अनुसंधान कार्य को शुरू किया जा सके । अनुसंधान केंद्र में मौजूद लोगों ने बताया कि जब से बरसात के मौसम की शुरुआत हुई और भारी बारिश कई कई दिनों में रुक रुक कर हुई है तब से आसपास के इलाके के नाले का आने वाला पानी से अनुसंधान परिसर में जल जमाव हो गया है जो कम नही हो रहा है । बारिश के पानी को निकालने का कोई ठोस उपाय नही किया जाएगा तबतक काफी अनुसंधान कार्य प्रभावित हो रहा है । अनुसंधान परिसर के जल जमाव को निकालने के लिए बीएमपी शिव मंदिर के पुलिया के पास किये गए अतिक्रमण को हटाना , टूटी चाहरदीवारी के निर्माण, टूटे नाले के निर्माण के बगैर सम्भव नही दिखाई दे रहा है।