ऑपरेशन के बाद प्रसूता की बिगड़ी तबियत, स्वजन ने किया हंगामा!

जमुई(मो० अंजुम आलम): विवादों से घिरा रहा शहर के बोधवन तालाब स्थित पुष्पांजलि हॉस्पिटल शुक्रवार को फिर विवादों में घिर गया। जहां गंभीर अवस्था में चिकित्सक द्वारा एक प्रसूता को रेफर करने के बाद स्वजनों ने जमकर हंगामा किया। चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए घंटों बवाल काटा। बता दें कि शहर के शितला कॉलोनी निवासी राजीव रंजन सहाय 13 जुलाई को अपनी 29 वर्षीय पत्नी प्रीति बाला को प्रसव के लिए शहर के एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया था। जहां से रेफर करने के बाद उसे पुष्पांजलि हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सक द्वारा ऑपरेशन किया गया लेकिन बच्चा मृत अवस्था में पैदा हुआ। स्वजन ने बताया कि ऑपरेशन के बाद प्रसूता को होश आया और 14 जुलाई के दोपहर तक उससे बात भी हुई लेकिन उसके बाद से अचानक बेहोश हो गई और अबतक 60 घंटा बीत गए लेकिन प्रसूता होश में नहीं आई। जब प्रसूता की स्थिति नाजुक हो गई तो चिकित्सक द्वारा उसे पटना ले जाने की बात कही गई थी। उसके बाद स्वजनों का आक्रोश चिकित्सक पर फूटा और हंगामा करने लगे। इधर हंगामा की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस द्वारा स्वजन से बात कर मामले की जानकारी ली और चिकित्सक से बात कर प्रसूता को पटना रेफर कराया गया.

दवा का डोज ज्यादा देने का चिकित्सक पर लगा आरोप-

प्रसूता के पति राजीव रंजन सहाय और स्थानीय लोगों ने बताया कि चिकित्सक द्वारा दवा का ज़्यादा डोज देने की वजह से प्रसूता का किडनी फेल कर गया है। चिकित्सक द्वारा दो दिन पहले हार्ट और बुखार की बात बताई गई थी लेकिन जब रेफर किया जाने लगा तो फिर किडनी फैल होने की बात कही गई। स्वजनों ने बताया कि जब प्रसूता की स्थिति नाजुक थी तो उसे 2 दिन पहले ही रेफर कर देना चाहिए था पैसा लेने की वजह से परिवार वालों को बरगला कर रखा गया। स्वजन ने बताया कि चार दिनों में दवा का 25 हज़ार, 15 हज़ार ऑपरेशन का फीस के अलावा ब्लड निकालने का 3800 रुपया सहित 80 हज़ार रुपया खर्च हो चुका है.

दो यूनिट ब्लड का लिया 3800-

विवेक सिन्हा और राजीव रंजन सहाय ने बताया कि जब महिला को भर्ती कराया गया था तो डॉक्टर द्वारा 5 यूनिट ब्लड लगने की बात कही गई थी। उसके बाद दो यूनिट ब्लड पुष्पांजलि हॉस्पिटल में ही स्वजन द्वारा दिया गया लेकिन ब्लड निकालने के एवज में 19 सौ रुपए एक यूनिट की दर से 38 सौ रुपया लिया गया। इसके अलावा तीन यूनिट ब्लड सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से भी लाकर दिया गया था.

महिला का बच्चेदानी फटा हुआ था। गंभीर अवस्था में परिवार वालों के जिद पर उसे 13 जुलाई को भर्ती किया गया था। कड़ी मुशक्कत के बाद उसका ऑपरेशन किया जा सका। बच्चे की मृत्यु ऑलरेडी पेट में ही हो चुकी थी। ऑपरेशन के बाद महिला का स्थिति में कुछ सुधार हुआ लेकिन फिर उसकी अचानक तबीयत बिगड़ गई डायलिसिस नहीं रहने की वजह से उसे पटना रेफर किया गया था। इलाज में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है। स्वजन द्वारा लगाया गया सारा आरोप बेबुनियाद और गलत है। 4 दिन बीत गए लेकिन अब तक फीस भी नहीं लिया गया है। परिवार वालों का जो भी पैसा खर्च हुआ है वह सिर्फ दवा में खर्च हुआ है।