एक यूनिट खून के बदले निजी क्लिनिक ने 11 हज़ार रुपए का किया डिमांड, वीडियो हो रहा वायरल

जमुई(मो. अंजुम आलम): इन दिनों जमुई में कुछ निजी क्लिनिकों की हरकत लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है। इलाज के नाम पर हज़ारों-लाखों का चूना मरीजों को लगाया जा रहा है। शहर में कुछ ऐसे निजी क्लिनिक संचालित हो रहे हैं जो अमूमन अपनी करतूतों की वजह से सुर्खियों में रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं खुल रही है। शहर के एक निजी क्लिनिक में ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। घटना 19 नवंबर की बताई जाती है। जहां सोसल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें ओ-निगेटिव ब्लड देने के एवज में 11 हज़ार रुपए का डिमांड राधिका इमरजेंसी अस्पताल के कर्मियों द्वारा किया जा रहा है। ओ-पॉजिटिव रहने पर कुछ कम पैसे में भी ब्लड उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। बता दें कि सिकंदरा प्रखंड के लछुआड़ निवासी 30 वर्षीय मु. नौशाद की तबियत बिगड़ने के बाद उसे 19 नवंबर को बोधवन तालाब स्थित राधिका इमरजेंसी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां चिकित्सक ने आवश्यक जांच के बाद टाइफाइड सहित खून की कमी बताया था। जिसे ओ-निगेटिव खून की आवश्यकता थी। डॉक्टर द्वारा बताया गया था कि अगर जल्द खून नहीं मिलता है तो मरीज की मुसबत बढ़ जाएगी। मजदूरी कर अपने परिवार का गुजर-बशर करने वाला उक्त मरीज सदर अस्पताल स्थित रक्त अधिकोष केंद्र भी गया, लेकिन वहां भी उसे उक्त ग्रुप का खून नसीब नहीं हो सका। हार कर मरीज पुन: उसी हॉस्पिटल में गया। जहां स्वास्थ्य कर्मी ने 11 हजार रुपए का डिमांड कर दिया।प्रबोध जन सेवा संस्था द्वारा पीड़ित को मुहैया कराया गया खून

जब पीड़ित से स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा 11 हज़ार रुपया का डिमांड किया गया तो किसी तरह इसकी जानकारी प्रबोध जन सेवा संस्था को मिली। उसके बाद संस्था की मानव रक्षा रक्तदाता परिवार के सचिव सुमन सौरभ की पहल पर उक्त मरीज को खून मुहैया कराया गया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर और भी खून का इंतेज़ाम किया जाएगा।

अवैध रूप से संचालित जांच घर व क्लिनिक पर नहीं हो रही कार्रवाई-

जिले के दर्जनों क्लीनिक व जांच घर ऐसे हैं जो बिना लाइसेंस और चिकित्सक के संचालित हो रहे हैं। सरेआम मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग गहरी नींद में सोई हुई है।जबकि जिले का स्वास्थ्य विभाग संचालित सभी निजी क्लीनिक एवं जांच केंद्र की सूची तैयार करने में करीब दो माह तक व्यस्त रहा। दर्जनों की संख्या में ऐसे क्लीनिक एवं जांच केंद्र की सूची उपलब्ध होने के बाद संबंधित क्षेत्र के प्राथमिक चिकित्सा पद, चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया था कि अवैध रूप से संचालित ऐसे संस्थान पर कड़ी कार्रवाई करते हुए जिला कार्यालय को अविलंब सूचित करें। लेकिन इन पदाधिकारियों द्वारा दिया गया कागज़ी निर्देश कागजों में ही सिमट कर रह गया। नतीजतन जिले में कई क्लिनिक व जांच घर धड़ल्ले से अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हैं।

वायरल वीडियो में ब्लड बैंक का नाम आने से सहमे हैं कर्मी-

ब्लड को लेकर खरीद-फरोख्त का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जब भी खून की बात आती है तो अमूमन सभी की निगाहें ब्लड बैंक की ओर आ जाती है। बता दें कि उक्त क्लीनिक कर्मी के द्वारा सदर अस्पताल परिसर स्थित ब्लड बैंक के कर्मी का नाम लिया गया है। वायरल वीडियो में बताया गया है कि उक्त केंद्र के कर्मी द्वारा पैसे लेकर खून मुहैया कराया जाता है। इसलिए कम से कम इतना पैसा तो देना ही होगा। इसे लेकर रक्त अधिकोष केंद्र के अधिकारी सहित कर्मी सहमे हैं। अब यह वीडियो की बात कितनी सच है यह तो जांच का विषय है।

पदाधिकारियों के निर्देश के बावजूद नहीं सुधरी ब्लड बैंक की दशा-

स्वास्थ्य व्यवस्था के बेहतर संचालन के लिए खासकर ब्लड बैंक की अहम भूमिका होती है। इसकी दशा सुधारने को लेकर बार राज्य स्तरीय पदाधिकारी का दौरा भी सदर अस्पताल में हुआ है। ब्लड बैंक की बारीकी से जांच पड़ताल कर आवश्यक दिशा निर्देश भी दिया गया है। लेकिन ब्लड बैंक की दिशा और दशा बद से बत्तर होती जा रही है। सदर अस्पताल या निजी क्लिनिक से ब्लड बैंक आने वाले खास लोगों को तो ब्लड मिल जाता है लेकिन आम लोगों को तो कई बार खून की झलक भी नहीं देखने मिलती है। घटना की जानकारी मुझे नहीं मिली है। पीड़ित व्यक्ति के द्वारा लिखित आवेदन देने के बाद दोषी पर कार्रवाई की जाएगी। वायरल वीडियो के सत्यता की भी जांच कराई जाएगी।डॉ. विजयेंद्र सत्यार्थी, सिविल सर्जन,सदर अस्पताल जमुई